रतनपुरा ब्लाक के कुड़वा स्थित पशु आश्रय स्थल में मौजूद छुट्टा पशु।संवाद
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मऊ। जिले के पशु आश्रय केंद्रों की हालत ठीक नहीं है। इन केंद्रों पर रखे गए मवेशियों के लिए हर चारे और पशु आहार की व्यवस्था नहीं है। मवेशी इन्हीं सूखे भूसे और पानी के सहारे जी रहे हैं। जितने मवेशी केंद्रों पर रहे हैं उससे कहीं अधिक सड़कों और किसानों के खेतों में घूम रहे हैं। मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के सरयां ग्राम पंचायत में बने पशु आश्रय में 65 मवेशी रखे गए हैं। यहां भूसा की व्यवस्था है। सोलर लाइट और पानी के लिए सबमर्सिबल पंप है। चिरैयाकोट के हाफिजपुर गांव में बने पशु आश्रय में महज 16 पशुओं के लिए सीमेंट शीट का शेड बनाया गया है़। यहां केवल पानी और भूसा है। देखभाल के लिए एक कर्मचारी है। घोसी के मछली मंडी में बने अस्थायी आश्रय केंद्र में 27 मवेशियों के लिए भूसा और पानी की व्यवस्था है। वलीदपुर जल निगम के परिसर में बने आश्रय केंद्र में 23 मवेशी हैं। जिले में कुल 53 पशु आश्रय केंद्र स्वीकृत हैं। इनमें से 26 संचालित हो रहे हैं। इनमें चार हजार 41 मवेशी रखे गए हैं। 27 केंद्र निर्माणाधीन हैं। इनके अलावा निराश्रित 362 मवेशी पशु पालकों को पालने के लिए दिए गए हैं। प्रति मवेशी तीन रुपये प्रतिदिन की दर से इन्हें भुगतान किया जा रहा है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. एम प्रसाद ने बताया कि निर्माणाधीन 27 पशु आश्रय केंद्रों को पूरा करने के लिए कहा गया है। सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों को केंद्रों में संरक्षित किया गया है। सभी जगह हरे चारे और आहार की व्यवस्था की गई है। इलाज की भी व्यवस्ाि कराई गई है।
नगर के गायघाट स्थित पशु आश्रय स्थल में मौजूद छुट्टा पशु।संवाद- फोटो : MAU