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उच्च न्यायालय के आदेश पर दीवानी कचहरी में मामलों की सुनवाई का समय निर्धारित

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मऊ। उच्च न्यायालय के आदेश पर जिला ऑरेंज जोन में होने के चलते आठ मई 2020 से न्यायालय सुचारू रूप से संचालन किए जाने का आदेश हुआ है। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में जिले में नियमित और अग्रिम जमानत पत्रों की सुनवाई विभिन्न न्यायालय द्वारा वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से होगी। जिला जज जितेन्द्र कुमार सिन्हा ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से नियमित और अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्रों की सुनवाई के लिए विभिन्न न्यायालयों के समय का निर्धारण बृहस्पतिवार को किया। यह जानकारी देते हुए मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजकुमार शाही ने बताया कि जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्रों की सुनवाई पूर्वाहन 11:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक होगी। वही विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्रों की सुनवाई पूर्वाहन 8:45 बजे से 9:15 बजे तक होगी । उन्होंने बताया कि अनन्य विशेष न्यायाधीश लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पाक्सो कोर्ट ) में जमानत प्रार्थना पत्रों की सुनवाई पूर्वाहन 9:30 बजे से 10 बजे तक होगी। वही विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट के न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्रों की सुनवाई सबह 10:00 बजे से 10:30 बजे तक होगी। विशेष न्यायाधीश विद्युत अधिनियम के न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्रों की सुनवाई अपराहन 12:45 बजे से एक बजे तक होगी। विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट के न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्रों की सुनवाई 12:15 बजे से 12:30 बजे तक होगी । आगे बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्रों की सुनवाई सुबह 7:30 बजे से 8:30 बजे तक होगी ।प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि सभी न्यायालयों में जमानत प्रार्थना पत्रों की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से होगी। वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए अधिवक्ताओं के लिए विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट कोर्ट संख्या 3 में वीडियो कांफ्रेंसिंग की व्यवस्था की गई है। अधिवक्तागण वहां उपस्थित होकर अपने अपने मामलों में अपना पक्ष रख सकते हैं । उन्होंने बताया कि नियमित सुनवाई वाले मामलों में सामान्य तिथि नियत कर दी जाएगी। केवल नियमित और अग्रिम लंबित और नए दाखिला वाले जमानत प्रार्थना पत्र ही उपरोक्त न्यायालयों में सुने जाएगें। इसके अलावा अन्य न्यायालयों में किसी अन्य मामले की सुनवाई नहीं होगी। उन्होंने बताया कि न्यायालय खुलने पर न्यायालय भवन एवं न्यायालय परिसर की साफ-सफाई थर्मल स्क्रीनिंग तथा प्रतिदिन सैनिटाइज किए जाने का निर्देश उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया है।
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