मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर एक अशोक कुमार ने गैर इरादतन हत्या के मामले में नामजद तीन आरोपियों में सुनवाई के बाद पति-पत्नी को दोषी पाया। दंपती को 7-7 वर्ष की सजा के साथ ही कुल 32-32 हजार रुपये अर्थदंड लगाया।
अर्थदंड न देने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं अर्थदंड जमा हो जाने पर संपूर्ण धनराशि का 75 प्रतिशत मृतक मांधाता के पिता राधेश्याम यादव को देने का आदेश दिया। एक आरोपी के नाबालिग होने के चलते उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई थी। मामला रानीपुर थाना क्षेत्र का है।
अभियोजन के अनुसार खुरहट गांव निवासी महिमा यादव पुत्र राधेश्याम यादव की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई। वादी ने बताया था कि 17 नवंबर 2013 को दिन में 2 बजे वह रिक्शा ठेला से धान लादकर अपने खेत से घर ले आ रहा था। उसी दौरान चाचा श्याम नारायण यादव, उनका लड़का सत्यपाल उर्फ राहुल और उनकी पत्नी उमा यादव ठेला मांगने लगे। आरोप था कि गाली देते हुए मारने पीटने लगे। वह भाग कर घर गया, घर वालों को पूरी बात बताया तो उसके पिता राधेश्याम, भाई मांधाता, बहन नीतू व माता बेचैनी देवी पूछने चले गए। जिसपर आरोपीगण ने लाठी, डंडा बल्लम से सभी को मारपीट कर घायल कर दिए। चोट लगने से मांधाता मौके पर बेहोश हो गया, इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने घटना की एफआईआर दर्ज कर बाद विवेचना श्याम नारायण यादव, और उमा यादव और एक नाबालिग के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए प्रभारी डीजीसी फौजदारी अजय कुमार सिंह ने कुल 11 गवाहों को पेशकर अभियोजन का पक्ष रखा।
एडीजे ने दोनों पक्षो के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी श्याम नारायण यादव और उमा यादव को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाया। दोस्ती पाए जाने के बाद दोनों को गैर इरादतन हत्या के मामले में 7-7 वर्ष की सजा के साथ ही 32-32 हजार रुपया अर्थदंड लगाया। एक आरोपी के नाबालिग होने के चलते उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई थी।