मऊ। नगर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों के परिषदीय विद्यालयों के कैंपस में निष्प्रयोज्य जर्जर भवन दुर्घटना का सबब बने हुए हैं। इन्हें चिह्नित तो कर लिया गया है लेकिन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अब तक नहीं की गई। ऐसे में अवकाश के बाद कई बच्चे जर्जर भवनों के पास खेल रहे हैं। हालांकि बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से 76 निष्प्रयोज्य जर्जर भवनों का मूल्यांकन करने के लिए एक साल पहले तीन सदस्यीय टीम को पत्र भेजा गया था, लेकिन टीम ने अब तक 22 भवनों का ही मूल्यांकन किया। ऐसे में इन जर्जर भवनों का ध्वस्तीकरण न होने से बच्चों के लिए खतरा बना हुआ है। गाजीपुर जिले के शरीफपुर गांव में गत दिनों निष्प्रोज्य प्राथमिक विद्यालय भवन का गेट गिरने के बाद मलबे में दबने से एक बालिका की मौत के बाद भी जिले के संबंधित विभागीय अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही। जिले में बेसिक शिक्षा विभाग से संबद्ध 1508 परिषदीय विद्यालय हैं। विभिन्न क्षेत्रों में तमाम ऐसे परिषदीय विद्यालय हैं, जिनके पुराने भवन जर्जर हो चुके हैं। नगर के भीटी स्थित परीषदीय स्कूल परिसर में और कासिमपुर में भी भवन जर्जर अवस्था में निष्प्रयोज्य हैं। शासन के निर्देश पर संबंधित भवनों के मूल्यांकन के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। टीम में पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग व ग्रामीण अभियंत्रण के अधिशासी अभियंता शामिल हैं। यह टीम भवनों का स्थलीय जायजा लेकर उसका मूल्यांकन निर्धारित करेगी। टीम की रिपोर्ट के बाद बीएसए कार्यालय की ओर से ध्वस्तीकरण के लिए नीलामी की जाएगी। अधिक बोली लगाने वाली संस्था को ध्वस्तीकरण की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। अधिकारियों की मानें तो तकनीकी समिति ने प्रति जर्जर निष्प्रयोज्य भवनों की मूल्यांकन काफी ज्यादा कर दिए जाने से नीलामी में कोई शामिल नहीं हो रहा है। जिला समन्वयक निर्माण बेसिक शिक्षा विभाग अजीत तिवारी ने बताया कि एक वर्ष पूर्व परिषदीय विद्यालयों के कैंपस में 76 निष्प्रयोज्य जर्जर भवनों के मूल्यांकन के लिए तीन सदस्यीय टीम को पत्र भेजा गया, लेकिन अभी तक 22 भवनों की रिपोर्ट मिली है। मूल्यांकन काफी अधिक हो जाने से नीलामी प्रक्रिया मेें शामिल होने के लिए कोई संस्था तैयार नहीं हो रही है। समिति को मूल्यांकन कम करने के लिए पत्र भेजा गया है।