जिला अस्पताल में लंबे समय से हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। ऐसे में हृदय रोग से जुड़े मरीज परेशान हो रहे हैं। जो पहुंच रहे हैं तो उन्हें प्रारंभिक उपचार ही मिल रहा है। गंभीर स्थिति में चिकित्सक रोगी को रेफर कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। उधर, अस्पताल प्रशासन भी इसी ओर से मुंह मोड़े है। जिले की 25 लाख की आबादी के स्वास्थ्य का जिम्मा उठाने वाले जिला अस्पताल में गंभीर रोगों के इलाज की व्यवस्था वर्षो से रामभरोसे चल रही है। हृदय रोग विशेषज्ञ का पद लंबे समय से रिक्त चल रहा है। जबकि अस्पताल में प्रतिदिन हृदय रोगी आते हैं। लेकिन यहां संसाधनों का अभाव है। फिजीशियन भी ओपीडी के टाइम में मिलते हैं। ऐसे में इलाज के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है। मरीज को बीएचयू या फिर निजी अस्पताल जाने की सलाह दी जा रही है। ऐसे में जो गरीब मरीज हैं उनको बेहद परेशानी हो रही है जबकि अन्य लोग बीएचयू या फिर किसी निजी अस्पताल में अपना इलाज कराने चले जाते हैं। कार्डियोलाजिस्ट के न होने का खामियाजा कई मरीजों को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ता है। कई बार हार्ट अटैक के मरीज को लेकर परिजन परेशान हो जाते हैं। जिला अस्पताल इलाज कराने आई बढुआगोदाम क्षेत्र की सुनीता सिंह, जानकी देवी ने बताया कि कि सीने में हल्की दर्द तथा घबराहट होने पर वह अस्पताल आईं। पता चला यहां कार्डियालॉजिस्ट नहीं हैं। अन्य चिकित्सक को दिखाने पर उन्हें बीएचयू जाने की सलाह दी गई। जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. नाहिदा खातून सिद्दिकी ने बताया कि अस्पताल आने वाले मरीजों का बेहतर इलाज कराने का प्रयास जारी है। अस्पताल में काफी समय से हृदय रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त चल रहा है। शासन को पत्र भेजा गया है।