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नियम दरकिनार, स्कूली वाहनों में बच्चों को खतरा बरकरार

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नगर में ओवरलोड डग्गामार वाहनों से ले जाए जा रहे स्कूली बच्चे।संवाद - फोटो : MAU
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मऊ। जिले के रानीपुर ब्लाक क्षेत्र में महासो रेल हादसा कांड के आठ वर्ष बाद न तो विभागीय अधिकारियों ने और न ही स्कूल संचालकों ने सबक लिया। नियम कानून को ताक पर रखकर नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में ओवरलोड डग्गामार वाहनों से स्कूली बच्चे ढोए जा रहे हैं। वहीं अनफिट 50 स्कूली वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। ऐसे में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर खतरा बरकरार है। परिवहन विभाग ने लापरवाह स्कूल संचालकों को नोटिस जारी किया है। जिले में 542 निजी स्कूल हैं। आठ वर्ष पूर्व रानीपुर थाना क्षेत्र के महासो रेल हादसा ने जनपदवासियों को हिला कर रख दिया था। हादसे में पांच बच्चों की मौत हो गई थी और 12 से अधिक बच्चे घायल हो गए थे। इसके बाद भी न तो स्कूल संचालक और न ही विभागीय अधिकारी सचेत हैं। सुरक्षा को ताक पर रखकर टैंपो, मैजिक में मानक से अधिक बच्चे बिठाए जा रहे हैं। इन वाहनों न तो जालियां हैं और न ही सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा। स्कूल प्रशासन से लेकर संबंधित विभागीय अधिकारी गंभीरता नहीं बरत रहे हैं। अधिकारियों की मानें तो स्कूल बसों तथा वाहनों में अग्निशमन किट, फर्स्ट एड बॉक्स होने पर ही फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। कहने को तो विभागीय अभिलेखों में 503 स्कूल बसें तथा 400 छोटे वाहन स्टाफ को लाने के नाम पर पंजीकृत हैं। जबकि स्टाफ वाहनों पर ही बच्चों को ढोया जा रहा है। स्कूल वाहन के लिए केवल बसें ही मान्य हैं। बावजूद इसके टेंपो, मैजिक वैन और तमाम छोटे बड़े वाहन स्कूल वैन के नाम पर लगाए गए हैं। स्कूल का नाम, फोन नंबर आदि लिखे बिना ही कई स्कूली बसें चल रही हैं। एआरटीओ रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि छोटे सवारी वाहन से स्कूली बच्चे को ले जाना गैरकानूनी है। ऐसे संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अनफिट स्कूल बसों का फिटनेस कराने के लिए स्कूल संचालकों को नोटिस जारी किया गया।
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