परदहां ब्लाक के बहरीपुर गांव स्थित रोडवेज के कार्यशाला में खराब होने के कारण खडी बसें।संवाद
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मऊ। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की लापरवाही का खामियाजा यात्री भुगत रहे हैं। वर्कशॉप में दो माह से सात बसें मरम्मत का इंतजार कर रही हैं। प्रबंधन इनके लिए पार्ट्स नहीं मंगवा पा रहा है। जबकि 14 बसों को कामचलाऊ मरम्मत कर उन्हें दौड़ाया जा रहा। यह रास्ते में कम जवाब दें जाएं इसका जवाब अधिकारियों के पास भी नहीं है। अधिकारियों की लापरवाही यात्रियों पर भारी पड़ रही है। परदहां ब्लाक क्षेत्र के बहरीपुर गांव स्थित रोडवेज कार्यशाला में सात बसें पिछले दो महीने से अधिक समय से मरम्मत के अभाव में खड़ी हैं। स्थिति यह है कि बसों को विंड शिल्ड, टायर तथा इंजन के पार्ट्स का इंतजार है। लेकिन मरम्मत के लिए सामान नहीं मिल पा रहा है। हालांकि इन बसों के पार्ट्स के लिए वर्कशाप प्रबंधन की तरफ से सेवा प्रबंधक आजमगढ़ से मांग किये जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में प्रत्येक बस से प्रतिदिन 25-30 हजार रुपये का नुकसान निगम को उठाना पड़ रहा है। इस लिहाज से परिवहन निगम को प्रतिदिन दो लाख रुपये से अधिक और हर महीने लगभग 60 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं 14 जर्जर बसों की कामचलाऊ मरम्मत कर उन्हें सड़क पर दौड़ाया जा रहा है। जिस कारण बसों के बीच रास्ते में खराब होने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय डिपो से कई रूटों पर बसों का संचालन न होने से यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा समस्या गाजीपुर-वाराणसी रूट के यात्रियों को उठानी पड़ती है। मऊ डिपो से संचालित एक भी बस गाजीपुर-वाराणसी रूट पर संचालित नहीं होती। गाजीपुर रूट पर यात्रा करने वालो यात्रियों को आजमगढ़, गोरखपुर तथा बलिया डिपो आदि की बसों पर निर्भर रहना पड़ता है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि रूट पर परमिट न होने से बसें नहीं चलतीं। इसके अलावा ग्रामीण रूटों पर भी नियमित तौर पर बसों का संचालन नहीं होता है। वरिष्ठ केंद्र प्रभारी रोडवेज उषा सिंह ने बताया कि मोलनापुर, चचाईपार, मझवारा तथा चिरैयाकोट के लिए फिलहाल बसों का प्रबंध किया गया है। एआरएम रमेश चंद ने बताया कि पार्ट्स के अभाव में बसों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। पार्ट्स के लिए समय-समय पर रिमाइंडर भेजा जा रहा है। पार्ट्स मिलते ही बसों की मरम्मत कराकर उनका संचालन कराया जाएगा।