मऊ। करोड़ों की लागत से बनी जिला अस्पताल की बर्न यूनिट बनने के छह वर्ष बाद भी विशेषज्ञ चिकित्सक के अभाव में शुरू नहीं हो सकी है। जिला अस्पताल के छोटे से कमरे में इसे संचालित किया जा रहा है। गंभीर मरीजों का प्राथमिक उपचार कर वाराणसी रेफर किया जा रहा है। जिला अस्पताल में तीन करोड़ की लागत से बनी बर्न यूनिट छह वर्ष से विशेषज्ञ चिकित्सक और स्टॉफ की तैनाती न होने से बंद है। 30 बेड के बर्न यूनिट के लिए चार विशेषज्ञ डाक्टर्स और 10 स्टॉफ नर्स की तैनाती होनी है। लेकिन वर्षो से लिखा पढ़ी चल रही है। हालत यह है कि जले मरीजों के इलाज के लिए जिला अस्पताल के एक कमरे में संचालित हो रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि मामूली रूप से जले हुए लोगों को भी अलग से कहीं रखने का इंतजाम नहीं है। आग में जले लोगों में तेजी से इंफैक्शन फैलता है, लेकिन इस हकीकत के बाद भी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ा जा रहा। गंभीर रुप से जले मरीजों के आने पर प्राथमिक उपचार कर रेफर कर दिया जा रहा है। करोड़ों की लागत से बनी बर्न यूनिट में टीकाकरण का काम चल रहा है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बृज कुमार ने बताया कि बर्न यूनिट में विशेषज्ञ डाक्टर्स और स्टॉफ की तैनाती के मामले में शासन को पत्र भेजा गया है।