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‘या हुसैन’ की सदाओं के बीच ताजिये कर्बला में हुए दफ्न

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घोसी के बड़ागांव में मोहर्रम पर निकला ताजिया का जुलुस। - फोटो : MAU
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नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में मोहर्रम के दिन ताजियादारों ने पैगंबर हजरत इमाम हुसैन की याद में मंगलवार को ताजिया का जुलूस निकाला। नगर में कदीमी रास्तों से होता हुआ ताजिया जुलूस देर रात कर्बला पहुंचे। जहां ताजिए दफन कर दिए गए। अंजुमनों की ओर से नौहाख्वानी के बीच सीनाजनी और जंजीरों का मातम किया गया। नगर क्षेत्र के कुल सात स्थानों से निकले मोहर्रम जुलूस के मद्देनजर नगर में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे।
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नगर क्षेत्र में मुहर्रम जुलूस खासतौर से रौजा बाजार, क्यारी टोला, घास बाजार, गोला बाजार और शाही कटरा से निकला। इन इलाकों से निकले ताजिए के जुलूस में अलग-अलग ताजियादार संगठनों के लोग शामिल रहे। जो नौहे और मातमी गीतों की धुनों पर सीनाजनी करते हुए चल रहे थे। देर शाम के बाद से ही ताजिएदारों का कारवां नगर के मुख्य मार्ग की ओर बढ़ चला था।
वलीदपुर: मुहम्मदाबाद गोहना कोतवाली क्षेत्र के नगर पंचायत वलीदपुर में मंगलवार को मुहल्ला विचलापुरा सदर इमामबाड़ा से 10वीं मुहर्रम का जुलूस निकला। ताजिया जुलूस विभिन्न रास्ते से होते हुए कर्बला में देर शाम दफन कर दिया गया। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी नितेश गौरव भी मौके पर मौजूद रहे।
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कोपागंज: मंगलवार को मोहर्रम की 10वीं तारीख को कोपागंज में कड़ी सुरक्षा के बीच अलम और ताजिये का जुलूस निकाला गया। इस दौरान पूरा इलाका या अली या हुसैन की सदा से गूंज उठा। जुलूस का आगाज चौक नं एक फुलेलपुरा पर मौलाना इम्तियाज हुसैन सहाब लखनऊ की दिल सोज तक़रीर से हुआ। जुलूस हनुमान चौक होता हुआ मौलाना हसन रजा इमाम जुमा, अशफाक हसनैन, कर्रार अली, असद रजा एवं आदि ताजियादारों की निगरानी में अपने क़दीमी रास्तों से काछी कला कर्बला में देर शाम प्रशासन की कड़ी सुरक्षा में दफन हुआ। धर ताबूत के जुलूस में नीमतले क़मा और जजीर का मातम हुआ और अंजुमन सज्जादिया ने दर्द भरे नौहे पढ़े। काट गए हाथ मेरे दरिया पे आंख से तीर निकालू कैसे...।
अमिला: कस्बा अमिला, करपिया बंजारी, हेमई, चिरैयाडांड़ उठे मातमी जुलूस ताजियादारों ने अमिला नगर मध्य चौक स्थित इमामे चौक से नारे तकबीर अल्लाहू अक्बर या हुसैन या हुसैन की सदा बुलंद करते व नौहा पढ़ाते मातम करते हुए कर्बला में दफन हुआ।
नगर चेयरमैन वंदना गुप्ता, पूर्व सभासद अखिलेश गुप्ता ने स्टाल लगाकर मातमी जुलूस में नौहा पढ़ने वालों को पानी व शरबत पिलाया। घोसी: कस्बा के बड़ागांव मे मोहर्रम के दसवे रोज मंगलवार को 12 बजे से दिन डूबने तक का ये मंजर रहा। सदर इमाम बारगाह पर ताबूत के बात अलम और ताजियों का जुलूस पंहुचा और वही पर दफ़न किया गया। इस के बाद अजादारों ने शाम ए गरीबा का जुलूस निकाला। ताबूत का जुलूस लगभग 4 बजे सदर इमाम बारगह पे दफन हुआ उस के बाद देर शाम ताजिया का जुलूस भी सादर इमाम बारगाह पे दफन हुआ। इस के बाद अंधेरा होते ही शाम गरीबा का मौन जुलूस निकला।
गूंजती रही लहू में डूबे हजारों की सदाएं
गजब का अक़ीदा, अक़ीदत का अलग अंदाज, फ़िजा में गूंजती या हुसैन या हुसैन की सदाएं और खुद के दामन पे कमा और जंजीर के मातम के धब्बे। नतीजतन लहू से सराबोर दामन तो हुआ पर ना बहते हुए लहू की चिंता ना चेहरे पर दर्द का निशान। नगर के बड़ागांव में मोहर्रम के दसवे रोज मंगलवार को 12 बजे से दिन डूबने तक का ये मंजर रहा। सदर इमाम बारगाह पर ताबूत के बात अलम और ताजियों का जुलूस पंहुचा और वहीं पर दफ़न किया गया। इस के बाद अजादारों ने शाम ए गरीबा का जुलूस निकाला।
दीने इस्लाम पर क़ुर्बान होने वाले मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की आज ही के दिन करबला के सहरा में दी गयी शहादत को इस नगर ने कोरोना काल के दो साल गुजरने के बाद बड़ी शिद्दत से याद किया। इस्लाम जिंदा होता है हर करबला के बाद का पैगाम देने में एक बार फिर यहां के अजादार अव्वल रहे।दोपहर में नमाज बाद ताबूत का जुलूस अपने परम्परागत रास्ते से आगे बढ़ा। बाजार स्थित इमाम चौक के पास मौलाना सैयद अली ने तक़रीर की उस के बाद दुरुल हसन के संचालन में मरसियाख्वानी करके सब को गमगीन किया। मरसिया के बाद जफर अली ने दर्द भरा नौहा पढ़ाऽजैनब ने कहा रोकरअब्बास खुदा हाफ़िजऽबाजार के क़रीब छोटा फाटक के चौक के पास जुलूस अंजमुन मासूमियां क़दीम के हवाले हुआ।छोटे फाटक के पास एक बार फिर जुलूस अंजुमन मासूमियां के हवाले हुआ। जुलूस में गांव विभिन्न अंजुमनो ने नौहा पढ़ा। उधर ताबूत के जुलूस मे नीमतले क़मा और जंजीर का मातम हुआ और अंजुमन सज्जादिया ने दर्द भरे नौहे पढ़े-ऽ काट गए हाथ मेरे दरिया पे आंख से तीर निकालूं कैसे ऽ।ताजिया के जुलूस में बड़े फाटक पर क़मा और जंजीर का मातम कर के अपने आप को लहूलुहान कर करबला के शहीदों को खराजे अक़ीदात पेश किया। नौहाख्वान के दर्द भरे नौहों को सुनकर महिलाएं सिसकती रही तो नौहेख्वान अपनी आवाज पर क़ाबू ना रख फफ़क़ पड़ते। ताबूत का जुलूस लगभग चार बजे सदर इमाम बारगह पर दफन हुआ उसके बाद देर शाम ताजिया का जुलूस भी सदर इमाम बारगाह पर दफन हुआ। इस के बाद अंधेरा होते ही शाम गरीबा का मौन जुलूस निकला।
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