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कोरोना ने ठप किया जरी का कारोबार

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नगर के गाजीपुर तिराहा स्थित औद्योगिक आस्थान में बंद पड़ी जरी निर्माण इकाई। - फोटो : MAU
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मऊ। कोरोना ने ताने बाने के रूप में पहचान वाले जिले में जरी के कारोबार पूरी तरह से ठप कर दिया है। मौजूद वक्त में कारोबार बर्बादी के कगार तक जा पहुंचा है। हर माह 20 से 25 करोड़ रुपये के टर्न ओवर वाले इस कारोबार के बंद हो जाने कारोबारी बेचैन हैं। उनका मानना है कि यदि आज लॉकडाउन खत्म भी हो जाए, तो कारोबार तत्काल रन नहीं कर पाएगा। प्रदेश में जिला जारी कारोबार का हब माना जाता था। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण ने इसे कहीं का नहीं छोड़ा। परिणाम है कि जरी कारोबार जिले में बिखर सा गया है। 23 लाख की आबादी वाले जिले में करीब डेढ लाख लोग बुनकरी पेशे से जुड़े हैं। हर माह एक लाख से अधिक साड़ियां गैर प्रांतों को भेजी जाती हैं। जरी कारोबारी जितेंद्र राखोलिया ने बताया कि जिले में यह कारोबार कुटीर उद्योग के रुप में स्थापित है। इससे करीब 20 से 25 करोड़ का टर्न ओवर होता था। लेकिन लॉकडाउन में शटर जो गिरा तो कारोबार कहीं का नहीं रहा। कारोबारी सुशील अग्रवाल ने बताया कि जरी के कारोबार में सैकड़ों लोग जुड़े हैं। व्यवसाय से करीब पांच हजार लोगों का परिवार जीता खाता है। लेकिन जनता कर्फ्यू के बाद ठप हुए कारोबार को खड़ा होने में काफी समय लगेगा। क्योंकि जब तक साड़ी की खपत नहीं शुरु होगी, जरी का कारोबार नहीं बढ़ेगा। कारोबारी गिरीराज अग्रवाल ने बताया कि लॉक डाउन से साड़ी का कारोबार प्रभावित हुआ, तो जरी का कारोबार प्रभावित होना स्वभाविक था। नंदकिशोर थरड ने बताया कि रॉ मैटेरियल खराब तो नहीं होगा, लेकिन डिजाइन पुरानी जरूर होगी। स्थिति सामान्य हुई तो भी सामान्य व्यक्ति साड़ी कपड़ा की खरीदारी नहीं करेगा। ऐसे में कारोबार के खड़ा होने में नया वित्तीय वर्ष आ सकता है। तब तक टैक्स, कर्मचारियों की तनख्वाह, मेंटिनेंस, बैंक का लोन आदि व्यापारी की कमर तोड़ चुका होगा।
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