मऊ। शासन की तरफ से निर्धारित समय सीमा बीत गया लेकिन लक्ष्य के सापेक्ष 50 प्रतिशत ही शौचालय निर्माण कार्य पूरा हो सका। शासन स्तर से समीक्षा के बाद जिला प्रशासन अलर्ट मूड में आ गया है। बुधवार की देर शाम पांच ब्लाकों की समीक्षा शुरू हुई तो मामला सामने आया। इस पर पांचों ब्लाकों के एडीओ पंचायतों को मानीटरिग नहीं करा पाने में लापरवाह पाया गया। जबकि समीक्षा में एक दर्जन ग्राम सचिव उपस्थित नहीं हुए। इस पर एडीओ पंचायतों को प्रतिकूल प्रविष्ट तथा ग्राम सचिवों का एक दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया गया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जनपद में दो लाख से अधिक शौचालय निर्माण यिका जाना था। मिशन की शुरूआत में प्रशासन का सारा फोकस इसी पर था। हालत यह रही कि धड़ाधड़ शौचालय निर्माण शुरू हुए। हालांकि इस दौरान भी पूर्व के बने शौचालयों की जीयो टैगिंग बड़े पैमाने पर की गई। एसबीएम, एलओबी के पूरा होने के बाद पात्रता सूची से वंचित पात्र परिवारों को एनएलओबी में समाहित किया गया। एनएलओबी के तहत जनपद में लगभग 20 हजार शौचालय बनाए जाने थे। इसमें शासनथ द्वारा निर्धारित तिथि 31 जून तक आधे ही शौचालय धरातल पर उतर पाए। इसको लेकर अब प्रशासन ने सख्ती शुरू की। बुधवार की देर शाम घोसी, बड़रांव, फतहपुर मंडाव, दोहरीघाट व कोपागंज विकास खंड की समीक्षा की। पांच ब्लाकों की समीक्षा शुरू हुई तो मामला सामने आया। इस पर पांचों ब्लाकों के एडीओ पंचायतों को लापरवाह माना गया कि वह मानीटरिग नहीं करा पाए। जबकि समीक्षा में एक दर्जन ग्राम सचिव उपस्थित नहीं हुए। इस पर एडीओ पंचायतों को प्रतिकूल प्रविष्ट तथा ग्राम सचिवों का एक दिन का वेतन रोकने का निर्देश दिया गया। इस बाबत डीपीआरओ घनश्याम सागर का कहना था कि कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समीक्षा में पांच एडीओ पंचायत की लापरवाही मिली है। एडीओ पंचायतों को प्रतिकूल प्रविष्ट तथा ग्राम सचिवों का एक दिन का वेतन रोकने का निर्देश दिया गया है।