नगर के पुरानी तहसील स्थित एक प्राइवेट भवन में संचालित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय।संवाद
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मऊ। जिले में आयुर्वेद चिकित्सा की दशा दयनीय है। कहने को तो 29 आयुर्वेदिक एवं छह यूनानी अस्पताल हैं लेकिन सुविधाएं न होने से मरीजों को इसका पूरा-पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। हालात यह है कि आयुर्वेद के 11 अस्पतालों को छोड़कर सभी अस्पताल गुमनामी के बीच किराए के भवन में संचालित हो रहे हैं। 25 लाख की आबादी वाले जिले में में आयुर्वेद के 29 तथा यूनानी के छह अस्पताल हैं। नगर के पुरानी तहसील स्थित किराए के भवन में संचालित 30 बेड वाले आयुर्वेद अस्पताल में जगह का अभाव तो बना ही है बल्कि यहां न तो पर्याप्त चिकित्सक है न ही पर्याप्त संसाधन। जबकि संक्रमण के समय आयुर्वेद पद्धति का महत्व बढ़ने के चलते इस अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों में करीब 20 से 25 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है। जिला क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी कार्यालय खुद नगर के निजामुद्दीनपुरा मुहल्ले में एक तंग गली में छोटे से मकान में संचालित हो रहा है। इस विभाग के पास वाहन तक की सुविधा नहीं है। नतीजतन अफसरों को अस्पतालों का निरीक्षण करने में दिक्कतें आती हैं। जिले के इन 35 अस्पतालों में सृजित पदों के मुकाबले न तो डॉक्टर हैं और न ही कर्मचारी। वर्तमान में आयुर्वेद अस्पतालों में 31 चिकित्सकों के मुकाबले केवल 15 चिकित्सकों की तैनाती है। जबकि छह यूूनानी चिकित्सकों के मुकाबले तीन चिकित्सक हैं। इन अस्पतालों में संसाधनों की भी बहुत कमी है। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. जयराम यादव ने बताया कि जमीन के अभाव में विभागीय अस्पताल नहीं बन पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें किराए के भवनों में संचालित करना मजबूरी है।