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जिला अस्पताल में एआरवी का टोटा

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जिला अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन खत्म होने के दरवाजे पर चस्पा सूचना।संवाद - फोटो : MAU
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मऊ। जिला अस्पताल में कुत्ते और बंदरों के काटने के बाद लगवाई जाने वाली एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) टोटा हो गया है। आठ दिनों से रोजाना 40 से 50 मरीज बिना इंजेक्शन लगवाए लौट रहे हैं। अधिकाशं को बाजार से इसे खरीद कर लगवाना पड़ रहा है। हालांकि मार्च में यहां 810 वायल का स्टॉक आया था। उधर, अस्पताल प्रबंधन इस बारे में डिमांड भेजे जाने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहा है। ठंड के मौसम में कुत्ते के काटने के मामले बढ़ते हैं लेकिन गर्मी में हर माह बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। नौ मई से अस्पताल में एंटी रैबिज इंजेक्शन न होने के चलते इन मरीजों को लौटना पड़ रहा है। इसमें 60 फीसदी कुत्ता काटने से संबंधित हैं। स्वास्थ्यकर्मियों की मानें तो खत्म होने से पूर्व इस माह आठ मई तक 846 लोगों को एआरवी लगाया जा चुका है। लेकिन स्टॉक खत्म होने के बाद उन्हें वापस लौटाया जा रहा है। मरीज बार-बार एआरवी के बारे में न पूछें इसके लिए दो जगहों पर इसके स्टॉक में न होने की सूचना चस्पा की गई है। मधुबन से आए रमेश ने बताया कि बंदर के काटने पर वह इंजेक्शन लगवाने जिला अस्पातल आए लेकिन पता चला कि इंजेक्शन खत्म हो गया है। कब मिलेगा इसकी जानकारी स्वास्थ्यकर्मियों के पास नहीं थी। जिला अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डाले तो आठ मई तक 846 मरीज पहुंच चुके है। चौकाने वाली बात है कि इन मरीजों में नगर से पहुंचने वाले मरीजों की संख्या महज 25 फीसदी तक ही है, बाकी 35 फीसदी बलिया तथा गाजीपुर जिले के मरीज हैं। शेष जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के हैं जो सीएचसी-पीएचसी पर इंजेक्शन न होने पर अस्पताल पहुंचते हैं। आठ दिनों में 846 मरीजों में बाहरी जिलों के115 मरीज थे। अप्रैल में 1925 मरीजों में 685 मरीज बाहरी जिलों के थे। उधर जिले के अलावा दूसरे जिलों के मरीजों के आने से अस्पताल में एंटी रैबिज इंजेक्शन का स्टॉक जल्द ही समाप्त हो जा रहा है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बृजकुमार ने बताया कि उन्हें मालूम है कि एंटी रैबिज इंजेक्शन का स्टॉम खत्म हो चुका है। इसके लिए मांग पत्र मुख्यालय को भेजा जा चुका है।
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