कोपागंज ब्लाॅक के एकौना पशु आश्रय स्थल से मवेशियों के बाहर निकलने का सिलसिला थम नहीं रहा है। चारा नहीं मिलने और भूख से तड़प कर वह बाहर निकल करर खेत की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। बाहर निकले मवेशियों को आश्रय स्थल में ले जाने के दौरान वहां के कर्मचारियों से मारपीट की भी नौबत आ चुकी है। उधर, किसान अपनी फसलों की बर्बादी देख परेशान हैं। अधिकारियों से शिकायत के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल रहा।
प्रदेश सरकार ने बेसहारा मवेशियों के संरक्षण के लिए विभिन्न क्षेत्रों में 10 आश्रय स्थल बनवाए हैं। इनके चारों तरफ कटीले तार से बैरिकेडिंग की गई थी। इसके बाद भी मवेशी लगातार बाहर निकलते रहे। परेशान चार गांवों के किसानों ने पिछले वर्ष गेट बनवा कर ताला बंद करने के लिए धरना भी दिया था। ब्लाॅक अधिकारियों के चहारदीवारी के निर्माण का आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ था।
इसके बाद आश्रय स्थल में चहारदीवारी तो बनाई गई लेकिन अभी तक वहां पर गेट नहीं लगाया गया। उस स्थान को बांस और बल्ली लगाकर छोड़ दिया गया। ऐसे में चारे के अभाव में मवेशी भूख से तड़पने के बाद बास और बल्ली को तोड़ बाहर निकल जा रहे हैँ और खेत में तैयार फसल को चट कर किसानों का नुकसान कर रहे हैं।
ब्लाक अधिकारी शिकायतों को करते है अनसुना
मऊ। कोपागंज ब्लाक के एकौना गांव में जहां पर आश्रय स्थल बनाया गया है, वहां मीरपुर, गौहरपुर, जोगरी, चौबेपुर, कोपड़ा, अंगरौला आदि गांव के किसानों का खेत है। धान की फसल में अब बाली आने के बाद आश्रय स्थल से मवेशी रात को बाहर निकल रहे है। किसान रामसरीख, शिवधन, प्रेमा, शिवधनी, विष्णु दत्त, सुदामा, पंकज, राजू, हरिकेश, सुरेन्द्र, रमेश आदि का कहना है कि आश्रय स्थल से मवेशियों के बाहर निकलने की शिकायत ग्राम सचिव सहित अन्य अधिकारियों से अनेक बार किया गया है। लेकिन अधिकारियों द्वारा हर बार नजर अंदाज कर दिया जाता है। कहा कि आश्रय स्थल में काम करने करने वाले कर्मी भी बेहद लापरवाह रहते है। वही कर्मियों ने बताया कि मवेशी का उपचार करने के लिए आने वाले चिकित्सक द्वारा कुछ मवेशियों को बाहर कर दिया जाता है।
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एकौैना पशु आश्रय स्थल का स्वयं निरीक्षण करूंगा। वहां पर जो कमिया है उसको तत्काल सही कराया जाएगा। लापरवाह कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- ओमप्रकाश सिंह, खंड विकास अधिकारी कोपागंज