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सिर्फ नाम के जिले के आंगनबाड़ी केंद्र

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मऊ। जिले आंगनबाड़ी केंद्र सिर्फ नाम के हैं। अधिकांश केंद्रों पर न तो बच्चों के खेलने की जगह है और न ही बैठने की पर्याप्त व्यवस्था। केंद्रों के बाहर बोर्ड भी नहीं लगाए गए हैं। ऐेसे में आंगनबाड़ी केंद्र को तलाशना मुश्किलों भरा है। वहीं कई केंद्रों पर ताला भी लटका है। कुछ सरकारी तो कुछ किराए के भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। जिले में 2587 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। इनमें शहर में कुल 300 केंद्र हैं। आंगनबाड़ी केंद्र सोमवार और बृहस्पतिवार को खुलते हैं। बृहस्पतिवार को कुछ को छोड़कर अधिकांश केंद्रों पर ताला लटका रहा। शहर में कुल 300 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। जिनमें से मात्र 15 ही सरकारी भवन में संचालित हैं, जबकि शेष किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं। स्थिति यह है कि केंद्रों के बाहर कोई बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। जिस कारण इन्हें तलाश कराना मुश्किल है। नगर के कुछ केंद्रों पर कार्यकर्ता बच्चों को पढ़ाते दिखाई दीं। शहर के वार्ड संख्या 15 में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र इमिलिया अष्ठम में बच्चों को पढ़ा रहीं कार्यकर्ता सुनीता गौतम ने बताया कि उनके केंद्र पर शून्य से तीन वर्ष तक के 46 और तीन से छह वर्ष के 42 बच्चे पंजीकृत हैं। सुबह आठ से दोपहर 12 बजे तक बच्चों को पढ़ाने के साथ उन्हें पोषाहार दिया जाता है। नए नियम के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र 300 वर्ग फुट बड़े स्थान पर ही संचालित होंगे। जबकि कई आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं, जहां 60 स्क्वायर फीट के कमरे में 12 से 20 बच्चों तक को रखा जा रहा है। एक बच्चे को खेलकूद के लिए कम से कम 25 स्क्वायर फीट की जगह चाहिए, लेकिन इन केंद्रों में बच्चों के लिए बैठने तक की भी जगह पर्याप्त नहीं है। परदहां ब्लाक के डुमरांव गांव में तीनों आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताला लटका रहा। वहीं वलीदपुर के खालिसा में सुबह 11.30 बजे तक कोई नहीं दिखा। केंद्र के बाहर गंदगी देखने को मिली। रतनपुरा एक में आंगनबाड़ी केंद्र को पशुओं ने अ़ड्डा बना लिया है। फतहपुर मंडाव के डुमरी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवन में चल रहा है। ग्राम प्रधान सुदामा यादव ने नियमित तौर पर पुष्टाहार नहीं वितरित करने का आरोप लगाया है। कोपागंज के ड़ाडीखास में प्राथमिक विद्यालय में ही आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। कोपाकोहना में सुबह 10 बजे तक केंद्र पर कोई नहीं दिखा। स्थानीय लोगों ने बताया है कि केंद्र प्राय: बंद ही रहता है। शहर में कई स्थानों पर केंद्र खोजे नहीं मिल रहे हैं। जबकि नगर में कुल 300 केंद्र संचालित हैं। कुछ को छोड़कर अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र केवल कागज पर ही संचालित होते दिख रहे हैं। स्थित यह है कि कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चे़ नहीं मिल रहे हैं। नगर के अस्तुपुरा मुहल्ले में में आंगनबाड़ी केंद्र पर 11 बजे केवल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहीं। बच्चों के बारे में पूछने पर बताया कि सहायिका बच्चों को लेने गई हैं। प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी अजय कुमार गौतम ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के नहीं खुलने के संबंध में जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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