नगर के मलिकटोला में मुहर्रम को लेकर आयोजित मजलिस में तकरीर करते मौलाना नसीमुल हसन।संवाद
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मऊ। चौथी मुहर्रम पर बुधवार को भी शहर समेत ग्रामीण इलाकों में मजलिसोें के आयोजन हुए। अजदारों ने मातम और नौहा कर कर्बला के शहीदों का खिराजे अकीदत पेश की। उधर, दर्द भरे नौहे अजादारों को रुला रहे हैं तो वहीं लोग मातम कर गमे हुसैन में शिरकत कर रहे हैं। मलिक टोला में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना नसीमुल हसन ने कहा कि इमाम हुसैन ने अपने परिवार और 72 साथियों के साथ इंसानियत को बचाने के लिए शहादत दे दी। कहा कि दुनिया में आतंकवाद के खिलाफ पहली जंग कर्बला में हुई। कोरोना काल के बाद यह पहला मौका है अजादार खुल कर अजादारी कर रहे हैं। इस दौरान मकसूद, मंसूर, जावेद, सिबतैंन, परवेज, अली, आसिफ रिजवी, आमान, फैजी, रिजवी, रजा आदि मौजूद रहे। घोसी : बड़ागांव में जैनबिया अजाख़ाने से अलम का जुलूस निकाला गया। शफ़क़त तक़ी और काजिम हुसैन के दर्द भरे नौहे ‘लख्ते दिल मोहम्मद जहरा का नूरे ऐन हूं, पानी दो मैं हुसैन हूूं’ और ‘मक़्तल में लाशों की अब पामाली है, आजा असग़र झूला तेरा खाली है’ ने अजादारों को सीनाजनी करने पर मजबूर कर दिया। जुलूस जाफरी मस्जिद से अपने परम्परागत रास्तों से होता हुआ देर रात सदर बाजार स्थित इमाम चौक पर समाप्त हुआ। यहां मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना शफ़क़त तक़ी ने कहा कि इमाम हुसैन कर्बला के मैदान में जंग करने नहीं गए थे बल्कि अमन और शांति का पैग़ाम देने गए थे। इमाम को अगर जंग करनी होती तो अपने साथ औरतों और बच्चों को लेकर न जाते। इमाम का मक़सद नाना का दीन बचाना था। इस दौरान मुहम्मद अली, उल्फत हुसैन, मारूफ, इफ्तेखार अब्बास, काजिम हुसैन,फ़ैयाज शब्बर, सलमान अख्तर, मुहम्मद तक़ी, अलमदार, अली रजा गुलाब, फरहत अब्बास शामिल रहे। मधुबन : तहसील क्षेत्र के सिपाह, बीबीपुर, दुबारी, मर्यादपुर, फतेहपुर, पूरा बंधु मल्ल, दरगाह में भी मजलिसें हों रही हैं। जिसमें मौलाना लोगोें को कर्बला के मसायब से रूबरू करा रहे हैं। ताशा के जुलूस में जहां रहीम खान, नसीर अंसारी, लियाक़त अली, कमालुद्दीन, अशरफ अंसारी, रुस्तम अली जैसे लोग ताशा के जुलूस की अगुवाई कर रहे हैं तो वहीं लक्ष्मण वर्मा, सुजीत गुप्त, हरी नारायण राजभर, अवधेश वर्मा, नीबू लाल विश्वकर्मा भी जुलूस में शामिल होकर गंगा जमुनी तहजीब का नजारा पेश कर रहे हैं।