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गाजर खास से बचाव के प्रति किसानों को कृषि वैज्ञानिकों ने किया जागरूक

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पिपरीडीह। परदहा ब्लाक क्षेत्र के ओन्हाईच ग्राम पंचायत में शनिवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद कुसमौर के तत्वाधान में 17वां गाजरघास जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में किसानों को गाजर घास से होने वाले नुकसान एवं उन्मूलन के प्रति जागरूक किया गया।
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गोष्ठी को संबोधित करते हुए कृषि विशेषज्ञ डॉ. आरती सिंह ने बताया कि पहले गाजर घास खाली जमीनों, सड़कों के किनारे तक ही सीमित थी लेकिन धीरे-धीरे यह खेतों में पांव पसारने लगी है। यह अब केवल फसलों के लिए ही नहीं बल्कि मनुष्यों व जानवरों के लिए भी गंभीर समस्या बन गई है। इसके पौधे में एक रसायन पाया जाता है। इससे इसके संपर्क में आने से मनुष्यों में एलर्जी, दमा, खुजली व अन्य त्वचा रोग व दुधारू पशुओं के दूध में विषाक्त उत्पन्न हो सकता है। वहीं डॉ. बनोथ विनेश ने कहा कि किसान घाजर घास का प्रयोग खाद के रूप में कर सकते है। किसान खेतों के पास गड्ढे बना कर उगी गाजर घास को सड़ा कर खाद के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। इसीक्रम में डॉ. कुलदीप ने बताया कि गाजर घास को नष्ट करने के लिए 20 प्रतिशत नमक के घोल व गलाइफो सेट व पैराकाट जैसे रसायनों के छिड़काव से भी नष्ट किया जा सकता है। गोष्ठी में राजेश, गिरजा, टुन्ना, हरिविलास, पंकज, मोहन आदि किसान उपस्थित रहे।
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