मऊ। जिलाधिकारी के निर्देश पर होली के मद्देनजर मिठाईयों एवं अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है। इसमें बड़े पैमाने पर मिलावटी सामान जब्त किए गए। मिठाई, दूध के बाद अब मऊ में भुना हुआ मिलावटी चना और जीरा भी बिक रहा है। विशेष अभियान में शनिवार को एसडीएम मधुबन अवधेश चौहान एवं सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन सुरेश कुमार मिश्र ने विभिन्न स्थलों पर मिलावट के संदेह में छापेमारी की। विभिन्न मिठाईयों और अन्य खाद्य पदार्थों के 10 नमूनों को जांच के लिए भेजा। टीम ने भोला तिराहा मधुबन स्थित प्रदीप गुप्ता के प्रतिष्ठान मेसर्स रूद्रांश स्वीट्स से रिफाइंड सोयाबीन ऑयल, छेना मिठाई का नमूना और मिलावटकी आशंका पर 162 किलोग्राम मिल्ककेक को नष्ट करा दिया। मिल्क केक की कीमत 37 हजार 260 रुपये थी।
मधुबन के ही ऋतिक मद्धेशिया के प्रतिष्ठान से बूंदी लड्डू एवं खोया का नमूना, राकेश के प्रतिष्ठान से पनीर का नमूना, प्रतिष्ठान मेसर्स-मद्धेशिया स्वीट्स से नारियल लड्डू, केशर बाटी एवं छेना टोस्ट मिठाई का नमूना और सिपाह इब्राहिमाबाद स्थित रामजन्म गुप्ता के प्रतिष्ठान से कचरी एवं बेसन का नमूना लिया। सभी नमूनों की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया। प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट मिलने पर अगर इन दुकानों के सामान में मिलावट की पुष्टि हुई तो इन सभी खाद्य कारोबारियों के खिलाफ, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। जांच दल में खाद्य सुरक्षा अधिकारी दिनेश कुमार राय, अमित राना, बिंदू पांडेय और सत्यराम यादव उपस्थित रहे।
-
बीते दिनों चेकिंग में जब्त हुआ था 776 किलो मिलावटी भुना चना और 22 किलो जीरा
जिले में इस साल 189 खाद्य नमूने फेल हुए हैं। इसमें अधिकांश दूध, मिठाई के हैं। लेकिन इस बार जिसमें कभी मिलावट नहीं होती थी उन खाद्य सामग्रियों में मिलावट मिली है। 22 मार्च को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने ब्रह्मस्थान स्थित दुकान से 72 हजार रुपये का मिलावटी भुना चना और जीरा जब्त किया है। इसमें 776 किलो भुना चना और 22 किलो जीरा था। त्योहारों पर खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से मिलावटखोर सक्रिय हैं। होली पर खाद्य पदार्थों में मिलावट के रोकथाम के लिए बीते दिनों खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने चारों तहसीलों के प्रतिष्ठानों पर चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान मिलावट की आशंका पर 50 से अधिक नमूने लिए और जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला के लिए भेजा गया। लेकिन इससे पहले चलाए गए चेकिंग में लिए गए नमूनों की बात करें तो 100 से अधिक नमूने जांच में फेल हो गए हैं। जिन पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया गया है। हालांकि जुर्माना भरकर तो लोग आसानी से बच जाते हैं। अप्रैल 2023 से फरवरी 2024 तक समय समय पर चेकिंग अभियान चलाकर विभाग ने विभिन्न प्रतिष्ठानों से 306 नमूने लेकर जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला में भेजा था। जिसमें जांच के बाद 189 नमूने फेल हो गए। विभाग ने इनके खिलाफ 53 लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं वर्ष 2022-23 में 335 नमूने जांच के लिए भेजे गए जिनमें 277 नमूने फेल हो गए। इस बार विभाग ने 59 लाख 99 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। लेकिन आश्चर्य की बात है कि विभाग द्वारा कार्रवाई के बाद भी मिलावटखोर सक्रिय हैं।
कैसे करें मिलावटी पनीर और खोवा की पहचान
सहायक आयुक्त खाद्य सुरेश कुमार मिश्रा ने बताया कि पनीर का टुकड़ा हाथ में मसलकर देखें। अगर यह टूटकर बिखर जाए तो यह मिलावट की पहचान है। इसमें मौजूद केमिकल दबाव नहीं सह पाता है। पनीर को पानी में उबाल कर ठंडा कर लें। ठंडा होने पर उसके ऊपर कुछ बूंदें आयोडीन टिंचर की डालें। अगर पनीर का रंग नीला पड़ जाए तो इसमें मिलावट है। नकली पनीर ज्यादा टाइट होता है। उसका आकार रबड़ की तरह होता है। इसी तरह, खोवा को हथेली पर रखने पर अगर वह तेल छोड़ता है तो उसमें मिलावट नहीं है। खोवा को हल्के गुनगुने पानी में डाल दें। फिर इसमें थोड़ा चने का आटा व चुटकी भर हल्दी मिला दें। रंग गुलाबी आता है तो मान लीजिए कि इसमें मिलावट है।
सहायक खाद्य आयुक्त सुरेश कुमार मिश्रा ने कहा कि समय समय चेकिंग अभियान चलाकर खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच की जाती है। मिलावट की आशंका होने नमूने जांच के लिए भेजे जाते हैं। फेल होने पर संबंधित के खिलाफ जुर्माना लगाया जाता है। होली पर्व पर मिलावट की रोकथाम के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। विभाग की टीमें चारों तहसीलों में सक्रिय हैं।