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अब्बास ने बचाई पिता का विरासत

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मऊ। जनपद की वीआईपी सीट में शामिल दो विधानसभा में लोकतंत्र के संपंन महापर्व में दो युवा विधायक मिले। मधुबन विधान सभा सीट पर बिहार के राज्यपाल फागू चौहान के बेटे तथा भाजपा प्रत्याशी राम विलास चौहान ने विजय श्री हासिल करके जनपद में पिता की सियासत का दबदबा बरकरार रखने में सफल रहे। जबकि मऊ सदर विधान सभा सीट को छठवीं बार अपने परिवार के कब्जे में बनाए रखने में मुख्तार अंसारी के बेटे तथा सुभासपा प्रत्याशी अब्बास अंसारी सफल रहे। बता दें कि भाजपा के दिग्गज नेता फागू चौहान की परंपरागत सीट घोसी विधान सभा सीट रही है। वे इस सीट से पांच बार विधायक रह चुके हैं। इन्हें बिहार का राज्यपाल बनाए जाने के बाद रिक्त सीट पर हुए उपचुनाव में विजय राजभर को टिकट दिया गया, वे विजयी भी हुए। लेकिन इस बार के चुनाव में फागू चौहान के बेटे रामविलास चौहान को टिकट दिया गया लेकिन पार्टी ने उनकी सीट बदलकर मधुबन कर दिया। क्योंकि मधुबन से भाजपा से पिछली बार चुनाव जीतकर विधानसभा जाने वाले दारा सिंह चौहान ने पार्टी बदलकर सपा में जा चुके थे। खैर जनपद में फागू चौहान का दबदबा कायम ही रहा है। इसका लाभ उनके युवा बेटे राम विलास चौहान को मिला और वे मधुबन विधानसभा में सपा के उमेश पांडेय को कड़ी टक्कर देते हुए पहली बार विजय श्री हासिल करने में सफल हो गए। उधर अब्बास अंसारी हालांकि इसके पूर्व वो घोसी विधान सभा सीट से पिछला चुनाव लड़ चुके थे। इसके अलावा भी अपने विधायक पिता के चुनाव का प्रबंधन करते रहे हैं। इस बार पिता की राजनीतिक जमीन पर उन्होंने सपा और सुभासपा गठबंधन से चुनाव लड़ा ओर जीत हासिल किया। इस प्रकार पांच बार से यानी 25 सालों से मऊ सदर विधान सभा पर मुख्तार अंसारी का कब्जा उनके बेटे ने बरकरार रखा।
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