स्वच्छ भारत मिशन के तहत जहां हर घर को शौचालय युक्त और खुले में शौच मुक्त अभियान को ब्लाक के अधिकारी ही चूना लगा रहे हैं। स्थानीय ब्लाक परिसर सहित कई सरकारी प्रतिष्ठानों में ही जन सामान्य के लिए एक भी शौचालय नहीं है। जिम्मेदार अधिकारियों की उपेक्षा से ब्लाक में चिराग तले अंधेरा है। इस अभियान को अमली जामा पहनाने वाले कई सरकारी कार्यालय और प्रतिष्ठान खुद शौचालय से वंचित हैं। इससे सरकारी प्रतिष्ठानों पर आने वाले महिला और पुरुष को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय क्षेत्र के खंड विकास कार्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी भवन, विद्युत विभाग और सभी बैंकों की शाखाओं पर आने वाले उपभोक्ताओं को शौचालय की सुविधा नहीं है। इन स्थानों पर भी केवल कर्मचारियों के लिए शौचालय बने हैं ,बैंक पर आने वाले ग्राहकों के लिए इसकी कोई सुविधा नहीं है। इससे महिलाओं पुरुषों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लघु शंका के लिए तो पुरुष सरकारी प्रतिष्ठानों की दीवारों को यूरिनल के रूप में इस्तेमाल कर लेते हैं। लेकिन महिलाओं को कठिनाई झेलनी पड़ती है। इस समस्या को ब्लॉक सभागार में होने वाली ग्राम प्रधान एवं क्षेत्र पंचायतों की बैठकों में उठाया जाता है लेकिन इसका कोई हल नहीं निकलता है। इसी प्रकार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं आंगनबाड़ी भवन पर जनसामान्य के लिए शौचालय की व्यवस्था न होने से सबसे ज्यादा दिक्कत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आने वाली आशा कार्यकर्ताओं एवं महिला मरीजों को होती है। पिछले साल जुलाई माह में खंड विकास अधिकारी आरके वर्मा ने निर्देश दिया था कि विकास खंड कार्यालय के परिसर में शौचालय बनवाया जाए लेकिन उनका आदेश हवा हवाई साबित हुआ। सपा नेता सिंपू मिश्रा, रामाश्रय यादव, संतोष कुमार आदि ने जिला प्रशासन से मांग किया है कि सामुदायिक केंद्र आंगनबाड़ी केंद्र एवं ब्लॉक परिसर में शौचालय बनवाए जाएं। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी आरके वर्मा का कहना है कि जरूरत वाले स्थानों पर जल्द ही शौचालय बनवाए जाएंगे।