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शिव का अर्थ ही कल्याण होता है: रविंद्र जी महाराज

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मऊ। मां विंध्यवासिनी सेवा समिति के तत्वावधान में नगर के भीटी मेें शिव महापुराण कथा का आयोजन किया गया। इस मौके पर कथावाचक रविंद्र जी महाराज ने कहा कि शिव का अर्थ ही कल्याण होता है। सभी पुराणों में शिव को त्याग, तपस्या, वात्सल्य और करुणा की मूर्ति बताया। शिव पुराण सुनने से कलयुग के पाप कर्मों से ग्रसित व्यक्ति को शिव भक्ति का मार्ग उपयोगी है। शिव महापुराण में 24 हजार श्लोक और 12 संहिताएं हैं। कथा के प्रारंभ में गुरूजी ने कहा कि एक बार नारायण जल में शयन कर रहे थे उसी समय जल की नाभि से एक सुंदर कमल उत्पन्न हुआ। ब्रह्माजी की उत्पत्ति हुई तो भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी में युद्ध छिड़ गया। उसी समय ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ। वही आगे चलकर भगवान शिव हुए। चंचला नामक एक पतिता स्त्री को शिव पुराण कथा सुनकर सद्गति प्राप्त हो गई। साथ ही साथ अपने कुमार्गी पति को भी मोक्ष दिला दिया। शिव पूजा की विधि बताए हुए कहा कि शिव पुराण सुनने के लिए व्यक्ति को उपवास नहीं रहना होता है। मात्र सात्विक भोजन करने से ही शिवपुराण की कथा सुनी जा सकती है। मांस और मदिरा का सेवन नहीं होना चाहिए। शिव पुराण ऐसी कथा है जो जीवन की सभी व्यथा को हर लेती है। पिता, गुरु और राजा तीनों एक समान होते हैं। मनुष्य के शरीर में ही चारों वर्णों की स्थिति को बताया। अंत में आरती की गई। मुख्य यजमान संजय कुमार पांडेय रहे। इस अवसर पर समिति के इंद्र पाल सिंह, अशोक सिंह, ऋषिकेश पांडेय, रामाशीष दुबे, विनोद कुमार चतुर्वेदी, कृष्णा नंद राय, विनोद नायक, अशोक चौरसिया उपस्थिति रहे।
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