मऊ। जिले की सड़कों पर रोजाना 7428 अनफिट सवारी वाहन दौड़ रहे हैं। अनफिट वाहनों से यात्रियों की जान जोखिम में है। आए दिन सवारियों से भरे अनफिट ऑटो और ई-रिक्शा चलते-चलते सड़क पर पलट जा रहे हैं। लोग गंतव्य तक पहुंचने की जल्दी में वाहनों की स्थिति नहीं देखते और उस पर सवार हो जाते हैं। यही नहीं मऊ डिपो की छह ऐसी बसें हैं जिनका फिटनेस तो समाप्त हो चुका है, लेकिन कागज में वो अब भी पूरी तरह फिट हैं। एआरटीओ विभाग ऐसे वाहनों की सूची तो तैयार कर लेते हैं, लेकिन कार्रवाई नाम मात्र की ही होती है। एआरटीओ कार्यालय के आंकड़ो के अनुसार सवारी वाहनों में 7139 ऑटो और 4894 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। जिसमें से 5213 ऑटो और 2215 ई-रिक्शा अनफिट हैं। बावजूद बीते अप्रैल माह में एक भी अनफिट वाहनों का चालान नहीं किया गया है। मऊ डिपो की रोडवेज बसों को बेशक विभाग की ओर से फिटनेस कागजों पर सही दिखाई जा रही हो, लेकिन हकीकत यह है कि छह बसें 13 साल पुरानी हो चुकी हैं। ये ऐसी बसें हैं जो कभी भी रास्ते में ही खराब हो जाती हैं। परिवहन निगम की छह बसें 80 के दशक की टेक्नॉलाजी की हैं। जो 13 साल से डिपो में सेवा दे रही हैं। मानक पूरा करने के बाद भी सवारियों को भरकर धड़ल्ले से सड़क पर चलती हैं। चलते समय इन बसों से धुंआ भी निकलता है। एक सप्ताह पहले ही लखनऊ से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होते हुए मऊ आ रही मऊ डिपो की एक बस अचानक बीच रास्ते में खराब होकर सड़क पर रूक गई थी। गनीमत रही कि बस मऊ डिपो से आठ किलोमीटर की दूरी पर खराब हुई। उसमें सवार यात्री पीछे से आ रही दूसरी बस से गंतव्य तक पहुंचे थे।
दो अप्रैल को ई रिक्शा पलट गया
दो अप्रैल की दोपहर कोपागंज के तड़ियाव में वाराणसी गोरखपुर फोरलेन पर सवारियों से भरा ई-रिक्शा अचानक पलट गया। जिसमें एक वृद्ध गंभीर रूप से घायल हो गया था। वहां से गुजर रहे राहगीरों से ई-रिक्शा उठाकर सभी को बाहर निकाला था। इस समय लोकसभा चुनाव को लेकर यातायात पुलिस और एआरटीओ की विशेष टीमें हर प्रमुख मार्गों पर चेकिंग अभियान चला रहे हैं। अब तो यातायात पुलिसकर्मी मोबाइल से वाहनों को नंबर प्लेट स्कैन कर किसी भी वाहन की स्थिति पता कर लेते हैं।