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आसवानी इकाई के चालू होने की जगी आस

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घोसी। किसान सहकारी चीनी मिल घोसी की आसवानी इकाई जो कि प्रदूषण नियंत्रण यंत्र के न होने कारण उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश से दो साल से बंद चल रही थी। आसवानी में बायोकंपोस्ट आधारित जीरो लिक्विड डिस्चार्ज यंत्र के अप्रैल से चालू हो जाने के चलते इसके पुन: चालू होने के साथ इथेनॉल के उत्पादन की आस जग गई है। किसान सहकारी चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक केएम सिंह ने ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में बताया कि मिल से सटे आसवानी इकाई में जीरो लिक्विडिटी यंत्र के न होने से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा बंद कर दिया गया था। इसके चलते आसवानी में अल्कोहल का उत्पादन बंद हो गया। साथ ही इथेनॉल प्लांट लगने के बाद भी वह भी कार्य नहीं कर रहा था। उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री तथा गन्नामंत्री के प्रयास से परिसर में बायोकंपोस्ट जीरो लिक्विडिटी डिस्चार्ज यंत्र लगाने का कार्य अगस्त 2018 में शुरू हुआ। प्रधान प्रबंधक केएम सिंह, आसवानी प्रबंधक विशाल माथुर ने बताया कि बायो कंपोस्ट जीरोलिक्विड डिस्चार्ज यंत्र अप्रैल के अंतिम सप्ताह में में चालू होने की पूरी संभावना है। इसके चलते चीनी मिल के 2.50 लाख लीटर सीरे के सदुपयोग होने के साथ चीनी मिल को रु10 करोड़ की अतिरिक्त बचत होगी। साथ ही 60 लाख लीटर इथेनॉल का भी उत्पादन होगा। बताया कि इससे गन्ना मूल्य के बकाया का जल्द भुगतान में सहयोग होगा।
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