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नाबालिग के साथ दुराचार करने में दोषी को सात वर्ष की सजा

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मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर एक वीरनायक सिंह ने नाबालिग के साथ दुराचार करने में नामजद दो आरोपियों में एक को दोषी पाते हुए सात वर्ष की सजा के साथ ही पांच हजार रुपया अर्थदंड का निर्णय सुनाया। अर्थदंड न देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वही एक आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। मामला कोतवाली मुहम्मदाबादगोहना क्षेत्र का है। मामले के अनुसार वादी मुकदमा का आरोप था कि उसकी दो नाबालिग लड़कियां 23 दिसंबर 2005 को शौच करने के लिए गई थी। जिन्हें आरोपीगण बहला फुसलाकर शादी का लालच देकर भगा ले गए। इस दौरान आरोपीगण उनके साथ दुराचार किया। मामले में वलिदपुर मठिया गांव निवासी अजय उर्फ बड़काई राजभर और विजय उर्फ छोटकाई राजभर को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर बाद विवेचना मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दुराचार की धारा की बढ़ोत्तरी करते हुए आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी मणिबहादुर सिंह ने कुल पांच गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एक पीड़िता को बालिग एक को नाबालिग पाया। इसके बाद आरोपी विजय उर्फ छोटकाई को नाबालिग के साथ दुराचार करने का दोषी पाते हुए सात वर्ष की सजा के साथ ही पांच हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। वही आरोपी अजय उर्फ बड़काई को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
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