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रोपे गए पौधों में से 60 फीसदी गायब

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घोसी/मऊ। मानसून सत्र आते ही पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए हर वर्ष पौधरोपण किया जाता है। इस दौरान वन विभाग की तरफ से नि:शुल्क पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं। वहीं कोराम पूरा करने के लिए 30 से 40 फीसदी पौधे ही अस्तित्व में आ पाते हैं। कारण जिम्मेदारों की उदासीनता। हालांकि कुछ लोग पौधों के संरक्षण की नैतिक जिम्मेदारी उठाए तो पौधों का अस्तित्व बचाया जा सकता हैं। ऐसा ही कुछ घोसी नगर पंचायत में देेखने को मिल रहा हैं। यहां नगर के दाल मिल स्थित, मिलबाग, एसडीएम कार्यालय के सामने कब्रिस्तान सहित अन्य स्थानों पर पौधों को रोपित किया गया था। इसके अलावा खुले जगहों खांचीझार, सीताकुंड के सामने, बड़ागांव, धोबीघाट आदि स्थानों पर पौधरोपण किया गया था। देखभाल के अभाव में या तो पौधे सूख चुके हैं या मवेशियों का निवाला बन चुके हैं। पर्यावरण संरक्षण के तहत घोसी नगर पंचायत ने वर्ष 2019 में 15 अगस्त तक दो चरणों में कई जगहों पर 2100 पौधे लगाए गए थे लेकिन इन पौधों में 1200 पौधे ही आकार ले सके। जो पौधे बचे हैं उनके संरक्षण का कारण है कि ये सभी पौधे कब्रिस्तानों के परिसर, तहसील के पीछे खाली जगह, बड़ागांव पूरब स्थित शिव मंदिर परिसर, बीआरसी तथा नगर के जूनियर हाईस्कूल के प्रांगण आदि स्थानों पर लगाए गए थे। चहारदीवारी होने से इन सभी पौधों का अस्तित्व बचा रहा। वहीं शेष पौधे जो खुली सड़क, खांचीझार, सीताकुंड के पास, बड़ागांव धोबीघाट, के साथ एनएच-29 तथा मधुबन मार्ग के किनारे के पौधों का अस्तित्व खत्म हो गया। खुले में लगे पौधे पशुओं के भोजन या देखरेख के अभाव में सूख गए। वहीं इस वर्ष भी नगर पंचायत द्वारा 2100 पौधे लगाए गए हैं। ऐसे में उम्मीद हैं बीते वर्ष से सबक लेते हुए जिम्मेदार इस बार तो पर्यावरण संरक्षण के प्रति खुद जागरूकता लाते हुए इन सभी पौधों को बचाने का प्रयास करेंगी।
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