शिक्षा सत्र का चार माह बीत चुके हैं, अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग से संबद्ध सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत शत प्रतिशत बच्चों के अभिभावकों के खाते में धन नहीं भेजा जा सका है। अभी तक पंजीकृत 1.25 लाख के सापेक्ष 67 हजार बच्चों के अभिभावकों के खाते में ही धन भेजा जा सका है। इसके चलते इन छात्र केे अभिभावक ड्रेस नहीं खरीद पा रहे हैं। बच्चे बिन ड्रेस के ही स्कूल जाने को विवश हैं। आला अधिकारी शीघ्र ही प्रक्रिया पूरी हो जाने की बात कहकर मामले से पल्ला झाड़ ले रहे हैं।
जिले में 1208 परिषदीय विद्यालयों में लगभग 1.25 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। शासन की तरफ से विद्यालयों में शत प्रतिशत नामांकन, ठहराव के लिए कई जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। लेकिन योजनाओं का क्रियान्वयन सही ढंग से होता नजर नहीं आ रहा है। विभाग की तरफ से बच्चों को दो सेट नि:शुल्क यूनिफार्म, स्वेटर, जूता, मोजा, बैग आदि के लिए प्रत्येक छात्राें के अभिभावकों के खाते में 1200-1200 रुपये जारी किया जाता है। शिक्षा सत्र के चार माह बीत गए, लेकिन अभी तक अभिभावकों के खाते में धन नहीं पहुंचा है। धन न मिल पाने से अभिभावक बच्चों के लिए ड्रेस तथा स्वेटर आदि खरीद नहीं पा रहे हैं। इसके चलते निजी स्कूलों के बच्चों को ड्रेस में जाते देखकर बच्चों में हीन भावना विकसित हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक 67 हजार बच्चों के अभिभावकों के खाते में धनराशि जारी की जा चुकी है। जबकि 58 हजार बच्चों के अभिभावक खाते में पैसा आने का इंतजार कर रहे हैं। खाते मेें धन न आने से अभिभावक बच्चों के लिए ड्रेस, जूता, मोजा सहित विभिन्न खरीद नहीं पा रहे हैं। अधिकारियों की मानें तो 30 हजार बच्चों के अभिभावकों के खाते में धन जारी करने के लिए प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। शेष अभिभावकाें के खाते में धन भेजने की प्रक्रिया चल रही है। इस संबंध में बढुआगोदाम क्षेत्र के सुनीता देवी, सावित्री यादव, रविंद्र यादव का कहना है कि शिक्षा सत्र का चार माह बीत गया, लेकिन अभी तक बच्चों के ड्रेस के लिए खाते में धन ही नहीं आ सका है। कब तक पैसा खाते में जारी होगा पता नहीं चल पा रहा है।
शीघ्र ही जिले के समस्त विद्यालयों के अध्ययनरत बच्चों के अभिभावकों के खाते में धन भेजने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। खंड शिक्षा अधिकारियों से ब्लॉकवार रिपोर्ट मांगी गई है।-अवधेश कुमार सिंह, जिला समन्वयक, बेसिक शिक्षा विभाग