नगर के नरई बांध स्थित पर्यटन विभाग का झील महल रेस्टोरेंट।संवाद
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मऊ। अमृत सरोवर का जिले में हाल काफी खस्ता है। एक भी सरोवर का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। 56 की खोदाई का कार्य शुरू भी नहीं हो पाया है। जिन 78 सरोवरों की खोदाई शुरु भी हुई वह अधर में हैं। कलेक्ट्रेट के पास झील महल अमृत सरोवर योजना के तहत चयनित है। यह भी बदहाल है। जनपद के नौ ब्लाकों के अंतर्गत कुल 134 अमृत सरोवरों का चयन किया गया है। ग्राम पंचायतों के खातों में बजट भी है लेकिन विभागीय शिथिलता से अब तक केवल 78 ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवरों की खोदाई का काम शुरु हो सका। यह सब अधूरे हैं। इसके अलावा 56 ग्राम पंचायतों में चयनित अमृत सरोवरों की खोदाई का कार्य शुरु ही नहीं कराया गया। इनमें से कई जमीनी विवाद में हैं। कई सरोवरों के भीटों पर अतिक्रमण हैं। अमृत सरोवरों की खुदाई के बाद उसकी तलहटी में वाटर रिचार्जिंग सिस्टम बनाना है। जिससे सरोवर और आसपास के भूगर्भ का जलस्तर संतुलित रहे। यहां पक्की सीढ़ियां, किनारों पर बैठने के लिए सीमेंटेंड बेंच, पाथ वे निर्माण, स्ट्रीट लाइटें और पौधरोपण होना है। अमृत सरोवर योजना के तहत गांवों में प्राय: पुराने पोखरों को ही चयनित किया गया है। गांवों के लोगों का कहना है कि पुराने पोखरों के घाटों की छिलाई सफाई करके उन्हें नया रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। डीसी मनरेगा उपेंद्र पाठक ने बताया कि अमृत सरोवरों के घाटों पर चारों तरफ पाथ वे का निर्माण कराया जाना है। नई मिट्टी पर पाथ वे का निर्माण कराने पर बरसात होने पर धंस जाएगा। इसलिए बरसात होने पर जब मिट्टी बैठ जाएगी। ऐसे में इनके निर्माण में देरी हो रही है।