मऊ। अंतर्राष्ट्रीय वानिकी दिवस के उपलक्ष्य पर आशा किरण सेवा समिति द्वारा बुधवार को प्रभात तारा स्कूल में भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। भाषण प्रतियोगिता में स्कूल के छात्रों ने भाग लेते हुए वानिकी की महत्ता पर विधिवत प्रकाश डाला। प्रतियोगिता के मुख्य वक्ता पर्यावरण विद कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी ने शुभारंभ मां सरस्वती मां की चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद वानिकी दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए मुख्य वक्ता ने बताया कि विश्व वानिकी दिवस पहली बार वर्ष 1971 ई. में इस उद्देश्य से मनाया गया था कि दुनिया के तमाम देश अपनी मातृभूमि की मिट्टी और वन - सम्पदा का महत्व समझे तथा अपने-अपने देश के वनों और जंगलों का संरक्षण करें। अगर हम भारत की बात करें तो 22.7% भूमि पर ही वनों और जंगलों का अस्तित्व रह गया। भारत में वन महोत्सव जुलाई 1950 से ही मनाया जा रहा है। इसी क्रम में स्कूल प्रधानाचार्य हेमा सिंह ने बताया कि वन-भूमि पर उद्योग-धंधों तथा मकानों का निर्माण, वनों को खेती के काम में लाना और लकड़ियों की बढ़ती मांग के कारण वनों की अवैध कटाई आदि वनों के नष्ट होने के प्रमुख कारण हैं। प्रतियोगिता में स्कूली छात्राओं ने बढ़ चढ़ कर भाग लेते हुए अपने विचार रख कर वन सरंक्षण का संदेश दिया।