लापरवाही:नगर में कुछ इस तरह से मैजिक वाहन से बच्चों को ले जाते चालक।संवाद
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मऊ। शिक्षा सत्र शुरु हुए 25 दिन बीत गए, लेकिन स्कूली बच्चों की सुरक्षा के परिवहन विभाग गंभीर नहीं हैं। लगभग अनफिट 350 स्कूल वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। विभाग ने 224 स्कूल संचालकों को नोटिस जारी किया है। जबकि स्कूल संचालक मानक के अनुरुप स्कूल बस चलाने का दावा कर रहे हैं। जिले में 542 निजी स्कूलों मेें लगभग 700 वाहन पंजीकृत हैं। आए दिन हादसों के बाद भी जिले में ओवरलोड स्कूली वाहनों पर लगाम नहीं लग पा रही है। इसके प्रति स्कूल प्रशासन से लेकर, अभिभावक सहित संबंधित विभागीय अधिकारी गंभीर नहीं हैं। स्कूली बसों में फर्स्ट एड बाक्स, पीने के पानी आदि की सुविधाएं भी जरूरी हैं, जिसका कत्तई ध्यान नहीं रखा जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो स्कूल बसों तथा वाहनों में अग्निशमन किट, फर्स्ट एड बॉक्स होने पर ही फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। स्कूल वाहन चालकों का ड्राइविंग लाइसेंस न होने की स्थिति में सबसे पहले स्कूल प्रबंधक की जिम्मेदारी तय की गई है। कहने को तो विभागीय अभिलेखों में 367 स्कूल बसें तथा 333 छोटे वाहन स्टाफ को लाने के नाम पर पंजीकृत हैं। जबकि स्टाफ वाहनों पर ही बच्चों को ढोया जा रहा है। स्कूल वाहन के लिए केवल बसें ही मान्य हैं, बावजूद इसके टेंपो, मैजिक वैन और तमाम छोटे बड़े वाहन स्कूल वैन के नाम पर लगाए गए हैं। स्कूल का नाम, फोन नंबर आदि लिखे बिना ही कई स्कूली बसें चल रही हैं। हालांकि परिवहन विभाग ने 224 स्कूल संचालकों को नोटिस जारी किया है। एआरटीओ रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। 224 स्कूल संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। छोटे सवारी वाहन से स्कूली बच्चे को ले जाना गैर कानूनी है। ऐसे संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
नियम का उलंघन:नियमों को ताक पर रखकर बस से स्कूलों बच्चों को ले जाया जा रहा,जबकि बस पर न स्कूल का नाम,- फोटो : MAU