मऊ। जिले की एक मात्र नगर पालिका के 16 कार्यकाल में से महज दो कार्यकाल में चेयरमैन बनने का मौका महिलाओं को मिल सका। शेष 14 कार्यकाल तक पुरुष इस कुर्सी पर काबिज रहे। अब 17 वीं नगरपालिका के गठन के लिए चुनाव हो रहा है। इसमें महिलाओं को अवसर मिलने के असार नहीं हैं। जिले कीएक मात्र नगरपालिका परिषद में अब तक 16 चुनाव हो चुके हैं। नगर की प्रथम नागरिक बनने वाली इन सौभाग्शाली महिलाओं में राना खातून कांग्रेस से 1995 से 2000 तक और शाहीना अरशद जमाल सपा प्रत्याशी के रूप में जुलाई 2012 से अपना कार्यकाल पूरा चुकी हैं। इसके पूर्व अब्दुल तलीफ नोमानी ऐसे सख्श रहे जिन्हें तीन बार नगरपालिका चेयरमैन बनने का मौका मिला है। निवर्तमान पालिकाध्यक्ष शाहीना के पति अरशद जमाल भी वर्ष 2000 से 2005 तक पालिकाध्यक्ष रह चुके हैं। मुसिल्म बहुल पालिकामें तीन बार भाजपा को भी मौका मिला है। लेकिन इस दौरान तीनों का कार्यकाल पांच साल नहीं रहा।नगरपालिका का पहला चुनाव 1953 में हुआ।नगर के पहले पालिकाध्यक्ष के रूप में इश्तेयाक अहमद 26 नवंबर 1953 से 21 सितंबर 1954 तक पालिकाध्यक्ष रहे। इनके बाद 22 सितंबर 1954 से 18 नवंबर 1957 तक पालिकाध्यक्ष के रूप में रहे। कांग्रेस के अब्दुल लतीफ नोमानी पहली दिसंबर 1964 से 14 दिसंबर 1966 तक तथा 31 जुलाई 1971 से 6 जनवरी 1973 तक पालिध्यक्ष रहने का सौभाग्य मिला था। तीसरे पालिकाध्यक्ष हफीजुर्रहमान नोमानी 16 सितंबर 1957 से 13 सितंबर 1959 तक पालिकाध्यक्ष रहे। चौथे पालिकाध्यक्ष जनसंघ के रामगोपाल खंडेलवाल बने जो 14 सितंबर 1959 से पांच अगस्त 1960 तक रहे। इनके बाद इसी पार्टी के बृजबिहारी लाल टंडन 25 अगस्त 1061 से 30 नवंबर 1064 तक नगरपालिका के चेयरमैन रहे। सातवें पालिकाध्यक्ष के रूप में मौलवी हबीबुल्लाह को महज कुछ महीनों तक मौका मिला। ये 10 जनवरी 1967 से 22 अप्रैल 1967 तक चेयरमैन रहे। इनके बाद राम गोपाल खंडेलवाल को फिर मौका मिला और वे 12 अप्रैल 1967 से 30 जून 1971 तक पालिकाध्यक्ष रहे। मौलाना हबीबुल्लाह को दो बार और मौका मिला । इन्हें दूसरी बार नौ जनवरी 1973 से 10 अगस्त 1977 तक तथा तीसरी बार आठ नवंबर 1988 से 18 जनवरी 1994 तक पालिकाध्यक्ष रहने का मौका जनता ने दिया। पहली महिला पालिकाध्यक्ष होने का गौरव राना खातूमन को मिला और ये पहली दिसंबर 1995 से सात जनवरी 2000 तक नगर की प्रथम महिला रहीं। इनके बाद मौलवी मुहम्मद यहिया तीन जुलाई 2000 से 30 नवंबर 2000 तक पालिकाध्यक्ष रहे। इनके बाद सपा का वर्चस्व बढ़ा और अरशद जमाल तीन दिसंबर 2000 को पालिकाध्यक्ष चुने गए। इनका कार्यकाल दो दिसंबर 2005 तक रहा। इनके बाद सपा से मुख्तार के प्रयास से तैयब पालकी को मौका मिला और ये 18 नवंबर 2006 से 13 दिसंबर 2011 तक चेयरमैन रहे। इसके बाद भी सपा का दबदबा कायम रहा और पिछडी महिला के लिए आरक्षित इस सीट पर अरशद जमाल अपनी पत्नी शाहीना को पालिकाध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज कराने में सफल रहे। शाहीना का कार्याकल 18 जुलाई 2012 से चार अगस्त 2017 तक रहा। अब 17वीं नगरपालिका के गठन के लिए चुनाव हो रहा है।