ोगर के निजामुद्दीनपुरा स्थित बिजली विभाग के ट्रांसफार्मर वर्कशाप में वर्कशाप की मरम्मत करते कर?
- फोटो : MAU
मऊ। जिले में एक तरफ जहां तापमान बढ़ने से गर्मी के तेवर तल्ख हो रहे हैं तो वहीं बिजली की बढ़ी खपत से ट्रांसफार्मरों पर बोझ बढ़ रहा है। जिससे वह फुंक जा रहे हैं। हालत यह है कि रोजना आठ से 10 ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद वर्कशॉप पहुंच रहे हैं। वर्तमान में वर्कशाप में अलग-अलग क्षमता के 250 ट्रांसफार्मर बन चुके है, वहीं 55 से ज्यादा मरम्मत के लिए खुले पड़े हैं। एक माह में करीब 300 ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। ऐसे में बिजली गुल हो रही है तो लोग गर्मी में परेशान हो रहे हैं। कृषि तथा कुटीर उद्योग पर असर पड़ रहा है। जिले के लगभग 50 विद्युत उपकेंद्रों से संबद्ध नगर सहित विभिन्न क्षेत्रों में करीब 16 हजार ट्रांसफार्मर लगे हैं। उपभोक्ताओं की मानें तो दशकों पूर्व विद्युतीकरण के बाद विद्युत तारों का सही ढंग से रख रखाव नहीं होने से विद्युत तार जर्जर हाल में हैं। खंभों से न्यूट्रल फेस गायब हो चुका है। ट्रांसफार्मर भी क्षमता के अनुसार नहीं लगाए गए हैं। गर्मी में बिजली खपत बढ़ने के चलते आए दिन ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो प्रतिदिन वर्कशाप में आठ से 10 फुंके ट्रांसफार्मर आ रहे हैं। जबकि वर्कशाप के स्टाक मेें 250 फुंके ट्रांसफार्मर को मेटेनेंस कर रखा गया है, जबकि 55 मरम्मत के लिए खुले हैं। नियमानुसार शिकायत मिलने 48 घंटे बाद इनकी मरम्मत कर संबंधित स्थानों पर लगा दिया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। विभागीय जिम्मेदारों का दावा है कि ग्रामीण इलाकों में 48 और शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे के भीतर खराब ट्रांसफार्मरों को बदलकर आपूर्ति बहाल की जा रही है। जिले में तपिश बढने के साथ ही ट्रांसफार्मरों के फुंकने का ग्राफ में बढ़ता जा रहा है। मार्च से अब तक 300 से ज्यादा ट्रांसफार्मर यहां पहुंच चुके हैं। वर्तमान मेें 10 केवीए के 10, 16 केवीए के 13, 25 केवीए के 190, 63 केवीए के 19, 100 केवीए के 21, 160 केवीए के दो, 250 केवीए के पांच, 400 केवीए के 15 और 630 केवीए के एकट्रांसफार्मर की मरम्मत की गई है। वहीं 55 ट्रांसफार्मर की मरम्मत की जा रही है। एसडीओ वर्कशाप मनोज मिश्रा ने बताया कि उपभोक्ता टोल फ्री नंबर पर कॉल कर विद्युत से संबंधित कोई शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर शहरी और 48 घंटे के भीतर ग्रामीण इलाकों के खराब ट्रांसफार्मरों को बदल कर आपूर्ति बहाल कर दी जाती है।