महिला जिला अस्पताल में शनिवार को सुबह 10 बजे तक ओपीडी में केवल एक डॉक्टर अपने चेंबर में इलाज करता दिखा। जबकि अन्य डॉक्टरों के चेंबर खाली थे। वहीं डॉक्टरों से इलाज कराने के लिए सुबह आठ बजे से पूरा ओपीडी हॉल मरीजों से भरा था। यह हाल तब है जब महज 24 घंटे पहले यानी शुक्रवार को जिलाधिकारी प्रवीण मिश्रा ने अस्पताल का निरीक्षण किया था।
अमर उजाला टीम शनिवार को सुबह साढ़े नौ बजे तक महिला जिला अस्पताल में रही। पर्चा काउंटर पर मौजूद कर्मी मरीजों की पर्ची काट रहे थे तो वहीं अन्य दो जगहों पर मरीजों की बीपी सहित अन्य जांचें की जा रही थीं। लेकिन अस्पताल की ओपीडी में केवल डॉक्टर कमाल ही अपने चेंबर में मरीजों का उपचार करते दिखे, बल्कि अन्य डॉक्टर के चेंबर खाली थे। पूछने पर पता चला कि ये डॉक्टर अभी थोड़ी देर बाद आएंगे। इतना ही नहीं रेडियोलॉजिस्ट कक्ष पर सुबह 9.45 बजे तक ताला लटका हुआ था, जबकि इसके बाहर जांच कराने के लिए मरीज बाहर बेंच पर इंतजार करते दिखे। इस संबंध में सीएमएस डॉ. जयशंकर प्रसाद का कहना है कि हमारे यहां डाक्टरों की कमी है, डाक्टर आते हैं तो सबसे पहले वार्ड में भर्ती मरीजों को देखने जाते हैं। ऐसे में हो सकता है कि वह उस समय वार्ड में राउंड पर गए हों।
दो महीने से अस्पताल की लिफ्ट खराब, बढ़ी परेशानी
जिला महिला अस्पताल में लगी लिफ्ट दो महीने से खराब है। अब तक लिफ्ट की मरम्मत नहीं हो सकी है, जिससे महिला मरीजों की दिक्कत बढ़ गई है। सबसे ज्यादा दिक्कत गर्भवती महिलाओं को हो रही है। न चाहकर भी उन्हें सीढ़ियों से चढ़कर ऊपरी मंजिल पर जरूरी कार्यों से जाना पड़ रहा है। ऐसे में कई बार उनकी तबीयत भी खराब हो जाती है। अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि अभी करीब कुछ माह पहले लिफ्ट सही करवाई गई थी, लेकिन लिफ्ट सिर्फ कुछ ही दिन तक ही चल सकी।