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Mau News: 837 के सापेक्ष 228 विद्यालय हुए निपुण

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मऊ। जिले के परिषदीय विद्यालयों को निपुण बनाने की शासन की कवायद लापरवाही की भेंट चढ़ रही है। गत वर्ष डायट प्रशिक्षुओं द्वारा 837 विद्यालयों में किए गए असेसमेंट में सिर्फ 228 स्कूल ही निपुण घोषित हुए हैं। प्रदेश में जिले को 30वीं रैंक मिली है। शिक्षकों के अनुसार निशुल्क पाठ्यपुस्तकें देर से आईं। बच्चाें की कम उपस्थिति का भी असर पड़ा। 2026 तक शत प्रतिशत विद्यालयों को निपुण घोषित करना है।
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जिले में 1208 परिषदीय विद्यालयों में करीब 1.48 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। शासन की तरफ से निपुण भारत मिशन शुरू किया गया है। इसका मकसद कक्षा एक से तीन में पढ़ रहे बच्चों को भाषा, गणित में निपुण बनाया जाना है। जिले में 44 एआरपी, 460 संकुल हैं। प्रत्येक एआरपी 10-10 विद्यालय और संकुल को एक-एक विद्यालय सहित 903 विद्यालय को निपुण बनाने का लक्ष्य दिया गया था। गत वर्ष विद्यालयों में निपुणता आंकलन करने के लिए डायट के प्रशिक्षु लगाए गए थे। इन प्रशिक्षुओं की टीम ने 837 विद्यालयों में एक से तीन तक हर कक्षा से 12-12 बच्चों का निपुण एप के माध्यम से ऑनलाइन मूल्यांकन किया था। जिसका विवरण निदेशालय भेज दिया गया था। विभाग के अधिकारियों के अनुसार केवल 228 विद्यालयों को निपुण माना गया है। शिक्षकों के अनुसार कई व्यवहारिक दिक्कतें रही। निपुण आनलाइन मूल्यांकन के दौरान बच्चों ने धीमा पढ़ा इसे एप नहीं लिया। नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें देर से आई। नियम के अनुसार कक्षा एक से तीसरी कक्षा तक 80 प्रतिशत दक्षता अनिवार्य है। एक प्रतिशत कम के चलते लगभग 200 विद्यालय जगह नहीं बना पाए।
निपुण विद्यालयों में रतनपुरा ब्लाॅक अव्वल
मऊ। जिले में घोषित किए गए निपुण विद्यालयों में ब्लाकवार नजर डाला जाए तो नगर में दो विद्यालय, रतनपुरा में 47 विद्यालय, परदहां में 32, रानीपुर में 39, मुहम्मदाबादगोहना में 18, कोपागंज में 14, घोसी में 17, फतहपुर मंडाव में 20, दोहरीघाट में 22 तथा बड़रांव में 16 विद्यालय सहित 228 विद्यालय निपुण घोषित किए गए हैं।
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निपुण मूल्यांकन के दौरान कई व्यवहारिक दिक्कतें आई। काफी संख्या में बच्चों ने धीमा से पढ़ा इसके चलते एप नहीं लिया। एक प्रतिशत कम के चलते लगभग 200 विद्यालय जगह नहीं बना पाए। विद्यालय निपुणता पाने की ओर अग्रसर हैं। जहां भी कमियां हैं दूर की जा रही है।
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- सीडी यादव, जिला समन्वयक प्रशिक्षण, बेसिक शिक्षा विभाग
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