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चुनाव में एक साथ दिखेंगे सपा बसपाजन

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मऊ। लोकसभा चुुनाव में पहली बार सपा बसपा कार्यकर्ता एक साथ दिखेंगे। दोनों पार्टियों के गठन के बाद से अब तक लोस चुनाव में कभी भी यह पार्टियां एक साथ चुनाव नहीं लड़ी थीं। दोनों पार्टियों का एक संयुक्त प्रत्याशी होगा। इन दोनों दलों की पहली संयुक्त बैठक चार दिन पहले हो भी चुकी है। वर्ष 1999 में हुए लोक सभा चुनाव में सपा और बसपा आमने सामने थीं। उस चुनाव में सपा से दारा सिंह चौहान तथा बसपा से बालकृष्ण चुनाव मैदान में थे। लेकिन चुनाव में बालकृष्ण चौहान का पलडा भारी रहा ओर उन्होंने दारा सिंह चौहान (वर्तमान वन मंत्री ,उत्तर प्रदेश) को पटखनी दी थी। पांच साल बाद 2004 में हुए चुनाव में सपा से चंद्रदेव प्रसाद राजभर तथा बसपा से बालकृष्ण चौहान आमने सामने रहे। इसमें बसपा पर सपा भारी रही और बालकृष्ण को पराजित कर चंद्रदेव राजभर दिल्ली दरबार पहुंच गए। लेकिन 2009 में दारा सिंह चौहान ने एक बार फिर पाला बदला और बसपा में आ गए। अब की बार सपा से अरशद जमाल उनके सामने थे लेकिन बसपा को एक बाद फिर घोसी की जनता ने पसंद किया और दारा सिंह चौहान लोकसभा पहुंच गए। इस प्रकार कल्पनाथ राय के निधन के बाद 1999 से 2014 तक घोसी लोक सभा का प्रतिनिधित्व बारी बारी से सपा और बसपा के पास रहा लेकिन 2014 में मोदी लहर में बसपा दूसरे और सपा चौथे नंबर पर चली गई। लेकिन इस बार नजारा बदला रहेगा। लगातार 15 सालों तक विजेता और दूसरे नंबर पर रहने सपा और बसपा अब की बार एक होकर विरोधी पार्टियों को टक्कर देंगी। अब देखना है कि इन पार्टियों का मिलन घोसी लोकसभा चुनाव में क्षेत्र के लिए कितना फायदेमंद होगा।
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