नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में गृहिणियां दीपावली को दोपहर अपने-रीति रिवाजों के अनुसार घरों की दहलीज से मंदिर और तिजोरी तक लक्ष्मी जी के स्वागत की तैयारी में जुटी रहीं, तब शाम को हुई महालक्ष्मी की पूजा। कहीं गेरु की पृष्ठभूमि में चावल की पीठी से छोटे-छोटे पांव छपे तो कहीं सीधे फर्श पर रुई से लक्ष्मीजी का मार्ग सुशोभित किया गया। मान्यता है कि दीपावली के दिन लक्ष्मी जी घरों में आकर विराजती हैं। घर के बाहर स्वास्तिक के चिह्न बनाने की भी परंपरा है। दीपावली पर पटाखों की धमक, आतिशबाजी की चमक और बाजार की खरीददारी की होड़ के बीच गृहिणियां लक्ष्मी जी के स्वागत की रस्में भी बराबर निभाती रहीं। कई स्थानों पर तो अच्छी रंगोली बनाने की होड़ लगी रही।इस संबंध में सुमन सिंह का कहना है कि दीपावली पर रंगोली बनाना शुभ माना जाता है। खरीदारी करने चौक बाजार आई सुनीता शर्मा का कहना है कि शादी से पहले बचपन से ही घर में ऐसी रंगोली बनाती आई हूं। कई वर्ष से हाथ जोड़े महिलाओं की तस्वीर और दीप की रंगोली बना रही हूं।