गरीबों के ईद का बंदोबस्त जकात है। ऐसे में अन्य लोगों के साथ ही गरीब भी त्योहार मना लेते हैं। मौलवी शमीम ने बताया कि जकात मालदारों की ईद के साथ गरीबों के ईद का बंदोबस्त है। जकात जिसके पास 28 हजार रुपया हो उस पर एक साल गुजर जाए तो जकात वाजिब होती है। सदका-ए-फित्र के लिए साल का गुजरना जरूरी नहीं है। सदका-ए-फित्र ईदगाह जाने से पहले देना चाहिए। यह रकम रोजेदार जब रोजा रहता है तो रोजा रखने में जो कोताही हो जाती है उसकी एवज में निकालता है। घर का हर मालिक अपने परिवार की तरफ से सबका फितरा अदा कर सकता है। अगर चंद घंटे में बच्चे पैदा हो तो उसका भी सदकए फित्र दिया जाएगा। सदका-ए-फित्र की मिकदार पौने दो किलो गेहूं या उसके बदले आंटा या उसकी कीमत है। जिस दिन अदा करे उस दिन बाजार की कीमत के लिहाज से अदा करे।