मऊ। मानसून आने में कुछ ही समय शेष हैं, लेकिन जिले के दोहरीघाट, सूरजपुर, दुबारी क्षेत्र को घाघरा की कटान से बचाव के उपाय अभी तक नहीं किया जा सका है। कटान से बचाव के लिए सिंचाई विभाग ने 2420.60 लाख रुपये का बजट शासन को भेजा है, लेकिन बजट स्वीकृत न होने से प्रोजेक्ट अधर में लटका पड़ा है। घाघरा के उफान से हर वर्ष दोहरीघाट, सूरजपुर, दुबारी सहित देवारांचल के कई गांवों में कटान की दिक्कत होती है। मानसून आने में कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन कटान के उपाय अभी तक न किए जाने से तटवर्ती इलाके के लोगों को नदी के कहर बरपाने की चिंता अभी से सताने लगी है। बीते वर्ष नदी ने दोहरीघाट क्षेत्र के धनौली रामपुर, नई बाजार, नौली, चिऊंटीडांड़, लामी, तारनपुर, कादीपुर, हरधौली, बहादुरपुर, बुढावर, पतनई, सरयां, ठिकरहिया, नगरीपार, रसूलपुर, सूरजपुर सहित विभिन्न तटवर्ती इलाकों में तांडव मचाया था। अब तक हजारों एकड़ उपजाऊं जमीन नदी में विलीन हो चुकी है। कटान से बचाव के लिए सिंचाई विभाग ने 2420.60 लाख रुपये का बजट शासन को भेजा है, लेकिन अभी तक शासन की मंजूरी नहीं मिली है। कटान पीड़ितों की मानें तो सिंचाई विभाग की तरफ से कटान रोकने के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाया जाता है, लेकिन उपजाऊं जमीन नदी में विलीन होती है। यही नहीं घाघरा में बाढ़ के पानी की समुचित निकासी न होने से करोड़ों रुपये मूल्य की फसल बर्बाद होती है। इस संबंध में दोहरीघाट क्षेत्र के सुधीर कुमार यादव, बसंत प्रसाद, जयनारायण सिंह, महेंद्र नाथ का कहना है कि बरसात पूर्व कटान से बचाव के लिए कार्ययोजना तो बनाई जाती है, लेकिन क्रियान्वयन सही ढंग से नहीं हो पाता है। बरसात के समय जब तक कार्य शुरू होता है तब तक नदी उग्र रुप धारण कर लेती है। प्रस्ताव कब तक स्वीकृत होगा अधिकारी बताने की स्थिति में नहीं हैं। इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र सरोज का कहना है कि कटान से बचाव के लिए 2420.60 लाख रुपये का बजट शासन को भेजा गया है। बजट मिलते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।