मऊ। विश्व हिन्दू परिषद व बजरंग दल के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने नगर के सहादतपुरा स्थित शिविर कार्यालय पर स्वामी विवेकानन्द जयन्ती मनायी। इस दौरानस्वामी विवेकानन्द के चित्र पर पुष्प व माला चढ़ाकर उन्हें याद किया गया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्व हिन्दू परिषद के प्रान्त उपाध्यक्ष रामकृष्ण भारद्वाज ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी 1863 में हुआ था जिनके घर का नाम नरेन्द्र दत्त था। नरेन्द्र की बुद्धि बहुत ही तीव्र थी और उनमें परमात्मा को पाने की प्रबल लालसा थी। स्वामी विवेकानन्द बचपन से इतने अतिथिसेवी थे कि स्वयं भूखे रहकर भी घर आए अतिथि को भोजन कराते, स्वयं रातभर बरसात में भीगते-ठिठुरते और अपने अतिथि को अपने बिस्तर पर सुलाते। उनका पूरा जीवन हिन्दू, हिन्दुत्व और हिन्दू समाज के लिए समर्पित रहा। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था।विश्व हिन्दू परिषद के जिलाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द जी ने शिकागो में दुनिया को शून्य का महत्व समझाया और पूरे विश्व को प्रेम शान्ति एवं हिन्दू धर्म के महत्व को समझाया। स्वामी जी ने दुनिया को बताया कि हिन्दू धर्म नहीं बल्कि एक जीवन-पद्धति है जिसका पालन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। दुनिया के सबसे प्राचीनतम धर्मों में सबसे प्राचीन धर्म सनातन-धर्म है।इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष गुलशन राजभर ने कहा कि यदि हिन्दू एकमत हो जाए तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।विचार गोष्ठी में स्वामी विवेकानन्द की को याद करने वालों में मनोज जायसवाल, कौशल कुमार, सुनील कुमार गोंड़, अभिषेक भारद्वाज, प्रकाश सरोज, विजेन्द्र पाल, विवेक चौहान, प्रांशु सिंह, सुजीत शर्मा आदि प्रमुख रहे।