दोहरीघाट। सरयू तट पर स्थित अंतरराष्ट्रीय मातेश्वरी महाधाम में शारदीय नवरात्र पर चल रहे दस दिवसीय अखंड महायज्ञ के छठवें दिन मातृभक्तों को रसपान करते हुए सदगुरुमहाराज ने कहा कि मनुष्य के गुणों का गुणगान होता है कि उसके द्वारा एकत्र किए गए संपति की जो व्यक्ति समाज में अपने व्यक्तित्व के कारण एक अलग पहचान बना पाता है ।उसकी सामाजिक कार्यो की चर्चा सदा होती रहती है। क्योंकि धन तो खत्म हो जाता है लेकिन मनुष्य का गुण कभी खत्म नहीं होते हैं भले ही वह व्यक्ति दुनिया मे न हो। इसलिए सदा समाज की भलाई सदाचार प्रेम भाव को अपनाते हुए जीवन निर्वाह करते हुए मां की भक्ति में मन लगाना चाहिए।