चिरैयाकोट। क्षेत्र के जसड़ा गांव स्थित पौहारी बाबा कुटी पर राम जानकी मूर्ति स्थापना के उपलक्ष्य में चल रहे सात दिवसीय भागवत कथा के सातवें दिन अयोध्या से पधारे केशव दास महराज ने कहा कि भगवान कृष्ण के द्वारिकाधीश बनने के बाद एक दिन उनके बचपन के मित्र सुदामा अपनी धर्मपत्नी के बार-बार कहने पर अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने के लिए आए। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें गले से लगाया और चरण धोया। भगवान ने सुदामा के पास के चावल को उनसे छीन कर खाना शुरू कर दिया। दो लोकों की संपत्ति प्रदान कर दिया। सुदामा और भगवान कृष्ण की यह मित्रता समाज के लोगों को यह संदेश देती है कि मित्र राजा हो या भिखारी मित्र तो मित्र होता है। मित्रता अमीरी गरीबी नहीं देखती। कृष्ण और जरासंध युद्ध का वर्णन करते हुए कहा कि जरासंध अपनी सेना लेकर मथुरा पर आक्रमण कर दिया भगवान ने एक-एक करके 17 बार जरासंध की सेना को पराजित किया। 18वीं बार ब्राह्मणों की प्रतिष्ठा को रखने के लिए भगवान कृष्ण रणछोड़ बनकर द्वारिकाधीश बन गए। राम कथा के पहले शुक्रवार को विधि विधान से राम जानकी मूर्ति की स्थापना की गईं। इस अवसर पर विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में आए श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर अपने जीवन को धन्य किया।