मऊ। शासन की तरफ से जल संचयन के लिए ग्रामीण इलाकों में लाखों की लागत से खुदवाए गए पोखरे शो पीस बनकर रह गए हैं। यही नहीं नहरी क्षेत्रों में भी तालाब सूखे पड़े हैं। हालत यह है कि भीषण गर्मी में जानवरों और पशु पक्षियों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। चुनाव के चलते इस बार तालाबों में पानी नहीं भरा गया है जबकि पारा 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जा रहा है। सब कुछ जानते हुए विभागीय अधिकारी मौन हैं। जिले में 684 ग्राम पंचायतें हैं। जल संचयन के लिए शासन की तरफ से लाखों की लागत से प्रत्येक गांवों में दो से तीन पोखरे खुदवाए गए हैं। इसके अलावा नहरी क्षेत्रों तथा आसपास के पोखरों में शासन की तरफ से पानी भरवाने का फरमान जारी किया गया था। लेकिन चुनाव के चलते विभागीय अधिकारियों ने आदेश का क्रियान्वयन करने की जहमत तक नहीं उठाई जा सकी है। अधिकांश गांवों में लाखों की लागत से खुदवाए गए पोखरों में पानी ही नहीं है। यही नहीं दोपहरीघाट पंप कैनाल मुख्य नहर तथा माइनरों के आसपास के तालाबों को भरवाया नहीं जा सका है। जबकि नहरों तथा माइनरों से नाली बनवाकर पोखरों को भरा जाना था। बोझी बाजार संवाददाता के अनुसार बडरांव ब्लाक क्षेत्र में 64 ग्राम पंचायतें हैं। लाखों की लागत से खुदवाए गए अधिकांश पोखरे बेकार साबित हो रहे हैं। ऐसे में पशु पक्षियों व अन्य वन्य जीवों को पानी के लिए तड़पना पड़ रहा है। शारदा सहायक खंड 32 काफी समय से सूखी पड़ी हैं। दोहरीघाट संवाददाता के अनुसार भीषण गर्मी के मौसम में क्षेत्र के गोफा तथा असना सुल्तानपुर के पोखरों में ही पानी है। नहर क्षेत्र के इलाकों के तालाबों में भी पानी भरवाने का काम कागज पर चल रहा है। इस बाबत डीडीओ विजयशंकर राय का कहना है कि खंड विकास अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। चुनाव बाद समीक्षा की जाएगी।