घोसी। वाराणसी के कैंट के पास हुए हादसे में मलबे में दबकर मरे एसएसबी के (एनडीआरएफ) जवान राममिलन चौहान का शव बुधवार की देर रात गांव पहुंचा। परिवार के सदस्यों ने गुरुवार की सुबह अंतिम संस्कार किया। बुधवार की देर रात को राम मिलन का शव उसके घर पहुंचने पर एक बार फिर से पूरा वातावरण गमगीन हो गया। इस दौरान मां बेटे के शव से लिपट कर रोती रही। वाराणसी कैंट के पास ओवरब्रिज का बीम टूटकर नीचे गिरा। इसमें दबने से घोसी कोतवाली क्षेत्र के बरूहा गांव निवासी राममिलन चौहान की मौत हो गई थी। राम मिलन सीमा सुरक्षा बल के एनडीआरएफ बिंग में तैनात था। इस दौरान उसकी तैनाती वाराणसी में थी। राम मिलन बड़ा बेटा था, उसकी लाश को देख मां अपना आपा खो दी। राममिलन की दोनों बहनें संगीता और रीना के साथ छोटा भाई रामाश्रय भी भाई के शव से लिपटकर रोने लगे। वाराणसी से पुत्र का शव लेकर आए पिता हरिनाथ भी रोते रहे। हरिनाथ ने जिस बेटे के सिर पर सेहरा सजाने और उसकी गृहस्थी के सहारे अपना बुढ़ापा पार करने का सपना देखा था, आज वह उसे पिंड दान करने जा रहा था। गुरुवार की सुबह मृतक राममिलन के शव के साथ आई एनडीआरएफ के उपनिरीक्षक जीडी प्रेम लाल, जीतेंद्र राय के साथ अन्य जवानों ने मातमी धुन बजाकर नम आंखों से अपने साथी को अंतिम विदाई दी। गांव के प्रधान व प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष विवेकानंन्द यादव गुरुवार की सुबह से राम मिलन की निकलने वाली अंतिम शव की तैयारी करने में जुटे थे। एनडीआरएफ की 11 बटालियन के उपनिरीक्षक प्रेम लाल, जितेंद्र राय, निजानंद पांडेय, अवनीश सिंह, सुमीत त्यागी आदि ने हथियार को उल्टा कर, मातमी धुन के बीच अंतिम सलामी देने के साथ पुष्प चक्र अर्पित किया। अंतिम दर्शन करने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी थी। पिता हरिनाथ ने दोहरीघाट स्थित मुक्तिधाम पर दिवंगत पुत्र को मुखाग्नि दिया।