अमिला । बाबा थानीदास की धूनी पर पांच दिवसीय रामचरित मानस कथा की शुरुआत मंगलवार की देर शाम हुई। कथावाचक नीरज शात्री ने कहा कि ईश्वर के प्रति श्रद्धा और विश्वास से ही भक्ति प्राप्ति होती है। भक्त के माध्यम से ही परमात्मा का सान्निध्य मिल सकता है। शास्त्री ने बताया कि मानस कथा की शुरुआत शिव ने कैलाश पर्वत पर की थी । यह कथा कुम्भज ऋषि, काक भुशुण्डि से होते हुए आज सबको सुलभ है।उन्होंने शिव पार्वती विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि चरित्र ही मानव को महान बनाता है।यही कारण है कि भगवान विष्णु के एक अवतार के रूप में श्री राम को पुरुषोत्तम राम कहा गया है।वन गमन एवं सीता हरण के वृतांत का भाव पूर्ण वर्णन करते हुए माता पार्वती द्वारा सीता का रूप धारण कर श्रीराम की परीक्षा लेने की कथा सुनाया।