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शिव विवाह वर्णन सुनकर भावविभोर हुए भक्त

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मऊ। कलयुग में श्रीराम कथा का श्रवण सबसे बड़ा धर्म है। पृथ्वी पर जब धर्म की हानि होती है, तब भगवान प्रकट होते हैं। भगवान राम, कृष्ण की तरह अवतरित होकर धर्म की रक्षा करते हुए पापियों का नाश करते हैं। यह विचार सोमवार को मानस मर्मज्ञ कमलेश जी महाराज ने नगर के हकीकतपुरा स्थित भूत भावन महादेव मंदिर पर आयोजित श्री रामकथा के दूसरे दिन मंगलवार को कही। कथा के दूसरे दिन कथा मर्मज्ञ कमलेेश महाराज द्वारा शिव विवाह का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को बताया कि भगवान शिव की बारात अद्भुत रही। भगवान शिव की बारात जब हिमाचल पहुंची तो माता पार्वती के माता पिता और वहां मौजूद प्रजा बारात में सम्मिलत भूूत, प्रेम, औघड़ को देखकर चकित रह गए। भगवान शिव की बारात में भगवान विष्णु और ब्रम्हा देव सहित देवता भी सम्मिलत रहे। कथावाचक ने कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भगवान शिव सभी त्याज्य वस्तुओं को अपनाकर उसका सम्मान बढ़ाया, उन्होंने अमृत को छोड़कर विष को कमनीय पुष्पों की माला को छोड़ कर सफेद फूलो को अपनाया। इतना ही नही मेवा पकवानों को छोड़कर बेलपत्र और धतूरा से संतुष्ट होना शिव जी के परोपकारी होने का अनुकरणीय उदाहरण है। कथा के समापन पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित किया गया। इस मौके पर चंद्रशेखर अग्रवाल, डा.राम गोपालगुप्त ,रवि प्रकाश बरनवाल ,पवन पांडेय , नंदलाल मौर्य, अरविंद चौहान, राकेश श्रीवास्तव सहित अन्य मौजूद रहे।
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