मऊ। आलू के भाव ने किसानों की कमर तोड़ दी है। जिन किसानों ने खुदाई के तुरंत बाद अपने आलू को खेत से व्यापारियों के हाथों बेंच दिया था,उन्हें तो कुछ पैसा मिल भी गया लेकिन जिन किसानों ने मुनाफा की दृष्टि से अपना आलू कोल्ड स्टोरेज में रखा। उनका तो काफी नुकसान हो रहा है। कम भाव के चलते कोल्ड स्टोरेज का किराया घर से देने की नौबत आ गई है। इससे किसान हताश हैं। कई किसानों ने अब आलू की खेती न करने का मन बना लिया है। फरवरी मार्च में जब आलू की खुदाई हुई तो उस समय आलू का भाव 325 से लेकर 350 रुपये प्रति कुंतल था। कुछ किसानों ने उसी समय के भाव पर अपना आलू खेतों से बेंच दिया। लेकिन अधिकांश बड़े आलू उत्पादक किसानों ने आलू को कोल्ड स्टोरों में इस उम्मीद से रखवाया कि इसे बाद में बेंचने से अच्छे भाव मिल जाएंगे। लेकिन आलू के भाव ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अब जब बुआई का समय आया है तो आलू का भाव और भी नीचे जा रहा है। किसान और कोल्ड स्टोरों के मालिक भी चिंतित हैं।किसानों की चिंता यह है कि खेती में भारी लागत खर्च करने के बाद भी उन्हें आलू की वाजिब कीमत नहीं मिल पा रही है। फरवरी मार्च में आलू की कीमत साढ़े तीन सौ रुपये प्रति कुंतल थी। कोल्ड स्टोर में रखे गए आलू का खर्च कोल्ड स्टोर का किराया, पल्लेदारी बोरा और भाड़ा सहित कुल खर्च 250 रुपये प्रति कुंतल आ रहा है। कोल्ड स्टोर में रखा गया आलू इस समय साढ़े तीन सौ रुपये में बिक रहा है। यानी फरवरी मार्च के बाजार भाव के अनुसार ही देखा जाए तो कोल्ड स्टोर का खर्च जोड़कर उसकी कीमत 600 रुपये प्रति कुंतल हो जाती है। लेकिन कोल्ड स्टोर से निकला आलू बिक रहा है साढ़े तीन सौ रुपया प्रति कुंतल में। इस प्रकार कोल्ड स्टोर का पूरा किराया किसान को अपने पास से देना पड़ रहा है।