मऊ। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए)के तहत बुधवार को जिला महिला अस्पताल एवं ब्लॉक स्तरीय चिकित्सालय में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान 1188 गर्भवती की जांच की गई। साथ ही उन्हें पोषण के बारे में बताया गया। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्याम नरायन दुबे ने कहा कि कार्यक्रम के तहत दूसरे व तीसरे माह की गर्भवती का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जिससे उन्हें प्रसव पूर्व एवं प्रसव के बाद की समस्याओं का सामना न करना पड़े। उनकी हीमोग्लोबिन, शुगर, एचआईवी, ब्लड प्रेशर समेत तमाम जांचें नि:शुल्क की गईं तथा समस्त केंद्रों में ग्रुप काउंसलिंग की गई। जिसमें संस्थागत प्रसव के फायदे बताकर, उन्हें संस्थागत प्रसव करवाने के लिए प्रेरित किया गया। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड, पेट की जांच, वजन, खून, पेशाब आदि की भी जांच कराई गई। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी नोडल डॉ. बीके यादव ने कहा कि जांच के माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि कहीं कोई गर्भवती उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में तो नहीं है। यह वह अवस्था है जिसमें मां या उसके भ्रूण के स्वस्थ जीवन को खतरा होता है। गर्भावस्था में जटिलताओं की संभावना अधिक होती है। उस गर्भावस्था को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था यानी हाई रिस्क प्रेगनेंसी में रखा जाता है। ऐसे में उन्हें डॉक्टर्स की देखभाल की आवश्यकता होती है। जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक संतोष सिंह ने बताया कि योजना के तहत हर महीने की नौ तारीख को गर्भवती की पूर्ण जांच की जाती है। जिला मातृत्व स्वास्थ्य परामर्शदाता अंजू ने बताया कि जिला महिला अस्पताल सहित सीएचसी में गर्भवती को विशेष सुविधा दी गई, उनके एमसीपी (मदर एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन ) कार्ड भरे गए। जिन महिलाओं में जोखिम की संभावना मिली उन्हें मातृत्व एवं शिशु सुरक्षा कार्ड पर लाल रंग की एचआरपी मोहर लगा कर चिह्नित किया गया। समस्त केंद्रों में कुल 1188 गर्भवती महिलाएं जांच के लिए आयीं जिसमें से 42 महिलाओं को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में रखा गया है। जिन्हें लगातार स्वास्थ्य परीक्षण की सलाह दी गई है।