आर्य समाज का 112वां वार्षिकोत्सव एवं ऋषि बोधोत्सव आर्य समाज में मनाया जा रहा है। संसार का सबसे पुनीत कर्तव्य यज्ञ से प्रथम दिवस की प्रात: कालीन बेला का प्रारंभ हुआ। यज्ञ में ब्रह्मा का उत्तर दायित्व स्वामी गिरिराज ने निभाया। यजमान के रूप में डॉ. नवीन सिंह, राजेश वर्मा, सर्वेश राय सपत्नीक रहे। वेद की पवित्र वेदी पर वेद मंत्रो के उच्चारण से पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया।
यज्ञ के पश्चात आर्य समाज के प्रधान दिनेश नन्दन राय ने ओम ध्वज को फहराया तथा विधिवत चार दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत किया। दोपहर 1 बजे से एक विशाल शोभायात्रा आर्य समाज से निकलकर संस्कृत पाठशाला, घास बाजार, चौक, रौजा, सिंधी कालोनी होते हुए रेलवे फाटक तक गयी।
पुन: इसी रास्ते से वापस आर्य समाज आयी। इस शोभायात्रा में रथों पर सवार बाहर से आये हुए विद्वान चल रहे थे। सबसे आगे मोटर साइकिल लिए जयघोष व नारे लगाते हुएअनुयायी चल रहे थे। दयानन्द बाल विद्या मंदिर के बच्चे बैण्ड बाजे से सबको मंत्रमुग्ध कर रहे थे। बच्चे अपने-अपने हाथों में बैनर, ध्वज तथा तख्तियां लिए हुए थे। जिस पर आर्य समाज के विचार तथा राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत स्लोगन लिए हुए थे।
पंक्तिबद्ध चलते हुए बचे जयघोष तथा भजन गायन करते हुए चल रहे थे। इस पूरे दृश्य को देखने के लिए रास्ते भर दोनों तरफ लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने बच्चों व शोभायात्रा में चल रहे लोगो का स्वागत कर रहे थे। शोभायात्रा में स्वामी केवलानन्द, गिरिराज, दिनेशचन्द राय, बृजेश सिंह, अजय जायसवाल, अशोक, सुमित राय, बब्बन प्रसाद, प्रहलाद वर्मा, शिवमुनि,रमाशंकर, प्रधानाचार्य देवभाष्कर तिवारी आदि उपस्थित रहे।