इंदारा। मां सरस्वती सेवा ट्रस्ट के तरफ से राम जानकी मंदिर मेला मैदान में चल रहे रामकथा के चौथे दिन अयोध्या से पधारे कथा वाचक अवधेश जी महाराज ने कहा कि कलियुग में श्रीराम कथा का श्रवण सबसे बड़ा धर्म है। पृथ्वी पर जब धर्म की हानि होती है, तब भगवान प्रकट होते हैं। भगवान राम, कृष्ण की तरह अवतरित होकर धर्म की रक्षा करते हुए पापियों का नाश करते हैं। शिव विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शिव की बारात अद्भुत रही। भगवान शिव की बारात जब हिमाचल पहुंची तो माता पार्वती के माता पिता और वहां मौजूद प्रजा बारात में शामिल भूूत, प्रेम, औघड़ को देखकर चकित रह गए। भगवान शिव की बारात में भगवान विष्णु और ब्रह्मा देवता शमिल हुए। कहा कि भगवान शिव सभी त्याज्य वस्तुओं को अपनाकर उसका सम्मान बढ़ाया। उन्होंने अमृत को छोड़कर विष पान किया। इतना ही नहीं मेवा पकवानों को छोड़कर बेलपत्र और धतूरा से संतुष्ट होना शिवजी के परोपकारी होने का अनुकरणीय उदाहरण है। कथा के समापन पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर अभिषेक सिंह, अंकुर सिंह, रामप्रताप यादव, विजय बहादुर सिंह, रामानंद यादव, प्रवीण वर्मा, उमाकांत पांडेय, संजय तिवारी, उदयभान सिंह, बबलू शाही आदि शामिल रहे।