दोहरीघाट। सरयू के पावन तट पर बसा अंतरराष्ट्रीय मातेश्वरी महाधाम में नवरात्र के पावन पर्व पर चल रहे नौ दिवसीय आदिशक्ति अखंड महायज्ञ के तीसरे दिन मातेश्वरी महाधाम के संस्थापक सद्गुरु महाराज ने कहा कि रेकी एक ऐसी अनमोल शक्ति है जिसको आध्यात्म और विज्ञान से मिलाकर तैयार किया गया है। जिसके प्रयोग से मनुष्य अपने साथ-साथ दूसरों का भी दुख दूर कर सकता है। रेकी विद्या का प्रमाण हिंदू धर्म के रामचरितमानस में भी मिलता है। राम वनवास के समय जब बालि और सुग्रीव की लड़ाई होती है तो बालि द्वारा मुष्टिका का प्रहार होने से सुग्रीव घायल हो जाते हैं तब भगवान राम रेकी विद्या का प्रयोग कर उनको ठीक करते हैं। गुरु वशिष्ठ ने भगवान राम को और महात्मा बुद्ध ने अपने भिक्षुओं को रेकी विद्या प्रदान किया था। मातेश्वरी परिवार के प्रांगण में चल रहे अखंड महायज्ञ से पूरा क्षेत्र मातृभक्ति रस में डूबा हुआ है। हवन कुंडों से उठने वाली पवित्र सुगंधित धुओं से पूरा वातावरण शुद्ध हो रहा है।