पितृ पक्ष के पहले दिन मंगलवार को लोगों ने अपने पितरों का श्राद्ध किया। इस दौरान तालाबों, नदियों और कुंड पर तर्पण कराने वालों की भीड़ लगी रही। क्वार माह में अश्वनी माह के कृष्ण भाद्रपद प्रतिपदा के एक्कम तिथि से पितृ पक्ष शुरू होकर अमावस्या तिथि को समाप्त होगी। इन संपूर्ण कृष्ण पक्ष को पितरो को संतुष्ट करने के लिए समर्पित किया गया है, इसी कारण इसे पक्ष को पितृपक्ष कहा जाता है। मान्यता है कि यदि किसी मनुष्य का विधि पूर्वक श्राद्ध और तर्पण ना किया जाए तो उसे इस लोक से मुक्ति नहीं मिलती, वह प्रेत के रूप में इस संसार में ही रह जाता है, शास्त्रों के अनुसार इन दिनों में शाम तक पितृ धरती पर रहते हैं, शाम होने पर वो लौट जाते हैं, इस दिन का जो लोग लाभ नहीं उठाते हैं उन्हें पूरे वर्ष पितरों की नाराजगी का शिकार होना पड़ता है। इस दौरान मनुष्य को मानसिक आर्थिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।